Outrage erupts in Joshimath over Anoop murder case; people take to the streets demanding justice.
उत्तराखंड के जोशीमठ में दलित युवक अनूप कुमार की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। घटना को लेकर स्थानीय लोगों और जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शनिवार को बड़ी संख्या में लोग तहसील परिसर में एकत्र हुए और सभा के बाद बाजार में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अनूप के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
16 अक्टूबर को हरिद्वार में हुई थी अनूप की मौत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जोशीमठ निवासी अनूप कुमार की 16 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में हत्या किए जाने का आरोप है। परिजनों का आरोप है कि मामले का मुख्य आरोपी जोशीमठ में आईटीबीपी (ITBP) में कार्यरत है। परिवार का कहना है कि घटना के बाद प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए उन्हें जोशीमठ और हरिद्वार के बीच चक्कर लगाने पड़े।
परिजनों के मुताबिक, पुलिस की ओर से शुरुआत में प्राथमिकी दर्ज करने में टालमटोल की गई। बाद में हरिद्वार के एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद जीरो एफआईआर दर्ज हो सकी। परिवार और संघर्ष समिति ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पुलिस की कार्यशैली की जांच की मांग की है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच पर परिजनों ने उठाए सवाल
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति और मृतक के परिजनों का आरोप है कि घटना से जुड़े विवरण और साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद मामले को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी जांच की दिशा को लेकर उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। जोशीमठ पुलिस का कहना है कि घटना हरिद्वार में हुई है, इसलिए जांच वहीं होनी चाहिए।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिस घटना को वे हत्या बता रहे हैं, उसे प्राथमिकी में आत्महत्या से जुड़ी धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। उनका यह भी कहना है कि तहरीर में अपहरण का उल्लेख होने के बावजूद उससे संबंधित धाराएं शामिल नहीं की गईं।
इसके अलावा, परिवार ने मुख्य आरोपी के भाई पर अनूप को जान से मारने की धमकी देने और राजस्थान में हुए एक हादसे की जिम्मेदारी लेने का दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि इन बिंदुओं को भी प्राथमिकी में शामिल नहीं किया गया। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
परिवार के सामने रोजी-रोटी और कर्ज का संकट
अनूप कुमार अपने परिवार के भरण-पोषण का इकलौता सहारा था। परिवार के अनुसार, उसने बैंक से कर्ज लेकर टैक्सी खरीदी थी और इसी के जरिए घर का खर्च चलता था। उसकी मौत के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया है।
अनूप के परिवार में बीमार पिता, बुजुर्ग मां, पत्नी और छोटे बच्चे हैं। परिजनों के सामने एक ओर अपने बेटे और पति को खोने का दुख है, तो दूसरी ओर परिवार के भरण-पोषण और टैक्सी के बैंक ऋण को चुकाने की चिंता भी है। इसी को देखते हुए प्रदर्शनकारियों ने परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई है।
CM और DGP को भेजे गए ज्ञापन में रखीं ये मांगें
शनिवार को प्रदर्शन और सभा के बाद उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक (DGP) को ज्ञापन भेजा गया। इसमें मांग की गई है कि जीरो एफआईआर में संशोधन कर मामले में उचित और गंभीर धाराएं जोड़ी जाएं। प्रदर्शनकारियों ने इसे आत्महत्या के बजाय हत्या का मुकदमा दर्ज करने के साथ अपहरण और जान से मारने की धमकी से जुड़े आरोपों को भी जांच में शामिल करने की मांग की।
ज्ञापन में मुख्य आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों को कड़ी सजा दिलाने की मांग भी की गई है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने, मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद उपलब्ध कराने और टैक्सी पर लिए गए बैंक ऋण से राहत दिलाने के लिए शासन-प्रशासन से उचित कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्रवासी सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। ज्ञापन पर स्थानीय सभासदों, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संघर्ष समिति के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं।
फिलहाल अनूप कुमार की मौत के मामले में परिजनों और स्थानीय लोगों की निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।