Events like 'Kauthik' will help pass on Uttarakhand's traditions to the new generation: Dhami
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को देहरादून के रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड में अखिल गढ़वाल सभा की ओर से आयोजित उत्तराखंड कौथिक-2026 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने लोकसंस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए सभा की पहल की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोकभाषाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, मेले और पर्व राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। इन्हें सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कौथिक जैसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों, भाषा और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महोत्सव में लगाए गए हस्तशिल्प, जैविक उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मंचों से स्थानीय कारीगरों, कलाकारों और उत्पादकों को अपने हुनर और उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी योजनाओं पर काम कर रही है। इसके साथ ही होम-स्टे, कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन और सुगंधित पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ युवाओं के लिए उनके अपने क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार करना है।
3 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
महिला सशक्तीकरण का जिक्र करते हुए सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत प्रदेश की तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, पहाड़ी व्यंजनों, हस्तशिल्प और कृषि आधारित गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कौथिक में महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से लगाए गए स्टॉल महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का उदाहरण हैं। ऐसे प्रयासों से महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बाजार और आमदनी के नए अवसर मिल रहे हैं।
रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए अपने गांव और घर से दूर जाने की मजबूरी से बचाना है। उन्होंने पलायन निवारण आयोग की सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि उत्तराखंड में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उनके अनुसार, यह स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने का संकेत है।
उन्होंने बताया कि ‘वेड इन उत्तराखंड’, शीतकालीन पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म जैसी पहलों के माध्यम से राज्य में सालभर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे होटल व्यवसायियों, होम-स्टे संचालकों, स्थानीय उद्यमियों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में आयुष, वेलनेस, आईटी और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विकास के साथ विरासत का संरक्षण भी जरूरी
सीएम धामी ने कहा कि राज्य में विकास कार्यों के साथ सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखना भी जरूरी है। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में पुनर्विकास कार्यों के जरिए श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वहीं, वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्टार्टअप इंडिया की राज्यों की रैंकिंग में उत्तराखंड को ‘लीडर’ श्रेणी में स्थान मिला है। इसके अलावा नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में भी प्रदेश शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए स्थानीय उत्पादों, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को आगे बढ़ाया जाए।