Operation Sindoor: भारतीय सशस्त्र बलों ने बताया कैसे रोकते हैं Pakistani Attacks से नुकसान
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने सोमवार को बताया कि वे पाकिस्तान की ओर से होने वाले हमलों और आतंकी गतिविधियों से देश को कैसे सुरक्षित रखते हैं और नुकसान को कैसे न्यूनतम करते हैं। यह जानकारी एक अहम ब्रीफिंग में सामने आई, जो वायुसेना, थलसेना और नौसेना के शीर्ष कमांडरों द्वारा दी गई।
यह ब्रीफिंग पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद से दूसरी बड़ी साझा जानकारी है। गौरतलब है कि भारत ने इस ऑपरेशन के तहत 7 मई को पाकिस्तान और POK में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए नष्ट किया था।
ऑपरेशन सिंदूर: जवाबी कार्रवाई में सटीक रणनीति
भारतीय सेना ने बताया कि उन्होंने “precision targeting, multi-dimensional deployment और real-time intelligence” के जरिए पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि आम नागरिकों को कोई नुकसान न पहुंचे।
Indian Air Force ने हवाई हमलों को सटीकता के साथ अंजाम दिया, जबकि Indian Army ने सीमा पार होने वाली गतिविधियों पर ground surveillance और counter-infiltration grid को मजबूत किया। Indian Navy ने समुद्री सीमाओं पर निगरानी और हाई अलर्ट बनाए रखा।
India-Pakistan DGMO Talks आज शाम
सूत्रों के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच Director General of Military Operations (DGMO) स्तर पर बातचीत आज शाम हॉटलाइन पर होनी है। यह बातचीत पहले दोपहर 12 बजे निर्धारित थी, लेकिन कुछ अज्ञात कारणों से इसे कुछ घंटों के लिए टाल दिया गया है।
बातचीत में सीमा पर शांति बनाए रखने, संवेदनशील इलाकों में गोलीबारी रोकने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
🛡 पाकिस्तान के हमलों से कैसे होता है नुकसान कम?
भारतीय सशस्त्र बलों ने बताया कि वे निम्नलिखित तरीकों से पाकिस्तानी हमलों के प्रभाव को कम करते हैं:
-
Advanced Surveillance Systems: LOC और IB पर हाई-टेक निगरानी तंत्र से आतंकी घुसपैठ की समय रहते पहचान।
-
Counter-Terror Units: रैपिड एक्शन फोर्स, NSG और स्पेशल फोर्स यूनिट्स की तैनाती।
-
Civilian Shielding Measures: सीमावर्ती गांवों में बंकर निर्माण और समय पर अलर्ट सिस्टम।
-
Cyber and Signal Intelligence: दुश्मन की रणनीतियों को पहले ही भांप लेने की टेक्नोलॉजी।