Occupying government land and forging documents! Uttarakhand HC asks, "How did you become an Indian?"
Uttarakhand High Court ने नेपाल मूल के लोगों द्वारा कथित रूप से फर्जी पहचान बनाकर भारतीय नागरिकता दस्तावेज हासिल करने और सरकारी जमीन पर कब्जा करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है।
मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश Manoj Kumar Gupta और न्यायमूर्ति Subhash Upadhyay की खंडपीठ ने राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
कोर्ट ने पूछा है कि नेपाल मूल के लोग किस नीति के तहत भारत में रह रहे हैं और उन्हें जमीन खरीदने की अनुमति कैसे मिल रही है।
क्या है मामला?
यह मामला Nainital निवासी पवन जाटव द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि:
नेपाल से आए कई लोगों ने नैनीताल और आसपास के इलाकों में सरकारी एवं वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर लिया
करीब 25 परिवारों ने अवैध निर्माण किए
बिना वैध नागरिकता प्रक्रिया के भारतीय दस्तावेज बनवा लिए गए
याचिका के अनुसार इन लोगों ने कथित तौर पर:
आधार कार्ड
वोटर आईडी
राशन कार्ड
ड्राइविंग लाइसेंस
स्थायी निवास प्रमाण पत्र
बिजली-पानी कनेक्शन
जैसे दस्तावेज हासिल कर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया।
सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि भारत और नेपाल के बीच 1950 की व्यवस्था के तहत दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के यहां रह और रोजगार कर सकते हैं।
हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि:
यदि कोई नेपाली नागरिक भारत में जमीन खरीदता है तो प्रक्रिया RBI के माध्यम से होनी चाहिए
नेपाल में भारतीयों को समान सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं
इसके बाद कोर्ट ने सरकार से संबंधित नीति और कानूनी प्रावधान पेश करने को कहा।
अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की है कि:
अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए
फर्जी दस्तावेज जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो
सरकारी भूमि पर कब्जों की जांच कराई जाए
दूसरे मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी
इसी दौरान हाईकोर्ट ने Khatima क्षेत्र के ग्रामीण रास्ते बंद करने के मामले में भी अहम टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि वन विभाग को ग्रामीणों का सदियों पुराना रास्ता बंद करने का अधिकार नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड देखने के बाद अदालत ने माना कि रास्ता लंबे समय से सार्वजनिक उपयोग में था।