उत्तराखंड में जनगणना को लेकर बड़ी अपडेट, 4 जिलों के बर्फीले इलाकों में आज से सर्वे

Uttarakhand Census 2026: उत्तराखंड के ऊंचाई वाले और बर्फीले हिमालयी क्षेत्रों में मंगलवार से जनगणना का काम शुरू हो गया है। इस चरण में चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के कुल 131 हिमाच्छादित गांवों को शामिल किया गया है। इसके अलावा बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री नगर पंचायतों में भी Census का काम कराया जाएगा।

जनगणना निदेशालय के मुताबिक इस अभियान के लिए कुल 182 प्रगणक और पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। ये कर्मचारी संबंधित क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों की गणना करेंगे। अभियान 30 सितंबर तक चलने की जानकारी दी गई है।

4 जिलों के 131 गांवों में होगी Census

इस चरण में उत्तरकाशी के सबसे अधिक 69 हिमाच्छादित गांवों को शामिल किया गया है। इसके बाद पिथौरागढ़ के 35, चमोली के 23 और रुद्रप्रयाग के चार गांवों में जनगणना की जाएगी।

कर्मचारियों की तैनाती की बात करें तो उत्तरकाशी में 110, चमोली में 38, पिथौरागढ़ में 22 और रुद्रप्रयाग में 12 कर्मचारी इस काम में लगाए गए हैं।

ऊंचाई वाले इलाकों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद Census प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा करने की तैयारी की गई है।

3 नगर पंचायतें भी अभियान में शामिल

हिमालयी गांवों के साथ बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री नगर पंचायतों को भी इस चरण की जनगणना में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में भी Census Team घर-घर जाकर जरूरी जानकारी दर्ज करेगी।

अधिकारियों के अनुसार जनगणना से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

OTP और Password को लेकर जारी की गई खास चेतावनी

जनगणना निदेशक ईवा श्रीवास्तव ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Census के दौरान किसी भी व्यक्ति से OTP, Password या संवेदनशील Financial Information नहीं मांगी जाएगी।

ऐसे में यदि कोई व्यक्ति जनगणना के नाम पर OTP, बैंकिंग डिटेल या अन्य गोपनीय जानकारी मांगता है तो उसे साझा नहीं करना चाहिए। इस तरह की सावधानी Cyber Fraud से बचने में भी मदद कर सकती है।

जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

इस बीच Caste Census की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को आरोप लगाया कि सरकार जिस तरीके से जनगणना करा रही है, वह जनता के साथ धोखा और केवल लीपापोती है।

उन्होंने मांग की कि मौजूदा प्रश्नावली को वापस लेकर सभी राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों से चर्चा के बाद इसे नए सिरे से तैयार किया जाए।

राहुल गांधी और खरगे के पत्रों का भी किया जिक्र

जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख चुके हैं। उनका आरोप है कि इन पत्रों पर सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी Caste Census के मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी और सरकार से इस संबंध में दिए गए सुझावों पर गंभीरता से विचार करने की मांग करेगी।

बिहार और तेलंगाना का उदाहरण दिया

रमेश ने बिहार और तेलंगाना में किए गए जातिगत सर्वेक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अपनाई गई व्यवस्थाओं से सीख लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रक्रिया तैयार की जा सकती है।

उन्होंने दावा किया कि देश में हजारों जातियां हैं और अलग-अलग राज्यों में जातियों की अपनी सूची मौजूद है। उनके मुताबिक केंद्र और राज्य स्तर पर उपलब्ध सूचियों को ध्यान में रखकर जातिगत जनगणना की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

2027 की Census को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

कांग्रेस का कहना है कि उसने वर्ष 2023 और 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी Caste Census की मांग उठाई थी। पार्टी के अनुसार केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को वर्ष 2027 में जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की थी।

अब उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शुरू हुआ यह Census चरण इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। वहीं, प्रश्नावली और जातिगत आंकड़े जुटाने के तरीके को लेकर राजनीतिक बहस भी जारी है।