अंकिता भंडारी केस में बड़ा अपडेट, तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने तीनों दोषियों को फिलहाल कोई राहत नहीं दी है। अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। तीनों आरोपी इस मामले में आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा काट रहे हैं। दो दिन तक चली सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने जमानत से जुड़ी उनकी याचिकाओं पर फैसला सुनाया।

अंतिम अपील पर सुनवाई अभी बाकी

तीनों अभियुक्तों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ Special Appeal दाखिल की थी। इसी के साथ उन्होंने अंतिम सुनवाई होने तक जमानत पर रिहा किए जाने की मांग भी की थी। हाई कोर्ट ने जमानत संबंधी प्रार्थना को खारिज कर दिया, जबकि मामले की अंतिम सुनवाई के लिए दाखिल अपील अभी लंबित रखी गई है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कई तर्क पेश किए गए, लेकिन अदालत ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।

अंकिता ने फोन पर लगाई थी मदद की गुहार

अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों में 18 सितंबर 2022 की घटनाओं को अहम माना गया। अंकिता भंडारी ने उस दौरान फोन पर मदद की गुहार लगाई थी। उसके फोन कॉल और रिकॉर्डिंग को भी अदालत के समक्ष साक्ष्य के तौर पर रखा गया। अभियोजन पक्ष का कहना है कि इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि अंकिता रिजॉर्ट छोड़ना चाहती थी और आरोपियों ने उसे वहां से जाने से रोकने की कोशिश की।

अंकिता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता नवनीश नेगी के मुताबिक, सुनवाई के दौरान उन साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा गया, जिन पर अभियोजन पक्ष ने भरोसा किया था। उनका कहना था कि आरोपी बाद में रिजॉर्ट लौट आए, लेकिन अंकिता उनके साथ वापस नहीं आई।

18 सितंबर को लापता हुई थीं अंकिता

अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई थीं। करीब छह दिन बाद 24 सितंबर 2022 को उनका शव चीला बैराज से बरामद किया गया था। जांच के बाद पुलिस ने रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

मामले में कोटद्वार की तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने तीनों आरोपियों को अंकिता की हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ आरोपियों ने हाई कोर्ट का रुख किया था। फिलहाल अदालत ने उनकी जमानत की मांग को खारिज कर दिया है और अंतिम अपील पर सुनवाई आगे जारी रहेगी।