Uttarakhand High Court में बड़ा बदलाव, जस्टिस मनोज कुमार तिवारी बने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश

उत्तराखंड हाईकोर्ट में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। भारत सरकार के Ministry of Law and Justice के न्याय विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी को Uttarakhand High Court का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति भारतीय संविधान के Article 223 के तहत की गई है।

9 अक्टूबर से संभालेंगे Acting Chief Justice की जिम्मेदारी

केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की नई जिम्मेदारी 9 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। मौजूदा मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता 8 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसके बाद जस्टिस तिवारी Acting Chief Justice के तौर पर हाईकोर्ट के प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।

वरिष्ठ न्यायाधीश के तौर पर दे चुके हैं सेवाएं

यह अधिसूचना केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव जगन्नाथ श्रीनिवासन की ओर से 6 अक्टूबर को जारी की गई। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी इससे पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट में वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी नई नियुक्ति के बाद हाईकोर्ट के Judicial Administration में निरंतरता बनाए रखने की उम्मीद है।

जस्टिस सुभाष उपाध्याय के स्थायी न्यायाधीश बनने का रास्ता साफ
इसी बीच उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर कार्यरत जस्टिस सुभाष उपाध्याय के लिए भी महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। कॉलेजियम की मंजूरी के बाद उनके Permanent Judge बनने की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। अब उनकी नियुक्ति से जुड़ी औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

1998 में शुरू की थी वकालत

जस्टिस सुभाष उपाध्याय का जन्म 12 दिसंबर 1972 को हुआ था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से BSc, LLB और MSW की पढ़ाई की। इसके बाद वर्ष 1998 में उन्होंने वकालत शुरू की। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में प्रैक्टिस करने के बाद उत्तराखंड राज्य गठन के पश्चात उन्होंने नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट में सिविल, संवैधानिक और सेवा मामलों में पैरवी की।
अपने लंबे कानूनी करियर के दौरान उन्होंने राज्य के Chief Standing Counsel समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। 30 मई 2025 को उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। अब कॉलेजियम की मंजूरी के बाद उनके स्थायी न्यायाधीश बनने की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।