कैंची धाम में जाम और धार्मिक कारोबार का मुद्दा गरमाया, वरिष्ठ कथाकार बटरोही ने उठाए सवाल

उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार और कथाकार प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ ने कैंची धाम क्षेत्र में बढ़ते यातायात दबाव और धार्मिक प्रतीकों के कथित व्यवसायीकरण को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक खुला पत्र लिखकर इन मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की है। उनके पत्र में कैंची धाम और नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर लगने वाले जाम से आम लोगों को होने वाली परेशानियों का भी उल्लेख किया गया है।

कैंची धाम के जाम को लेकर जताई चिंता

81 वर्षीय प्रो. बटरोही ने अपने पत्र में कहा है कि कैंची धाम के आसपास लगातार बढ़ते Traffic Jam का असर आम यात्रियों पर पड़ रहा है। उनके मुताबिक जाम की वजह से लोगों की ट्रेन और बसें छूटने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं और यात्रियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले को केवल धार्मिक पर्यटन के नजरिए से नहीं, बल्कि आम लोगों की Safety, Traffic Management और Public Convenience से जोड़कर देखने की अपील की है।

धार्मिक प्रतीकों के व्यवसायीकरण पर सवाल

प्रो. बटरोही ने पत्र में धार्मिक प्रतीकों के बढ़ते Commercialisation of Religion पर भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि आस्था से जुड़े स्थलों और प्रतीकों का जिस तरह व्यवसायीकरण हो रहा है, वह भविष्य में शासन-प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकता है।
उन्होंने अपने लंबे जीवन और नैनीताल से जुड़े अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र से उनके संस्कार और साहित्यिक जीवन की शुरुआत हुई, उसके बदलते स्वरूप को देखना उनके लिए पीड़ादायक है।

कैंची धाम के इतिहास का भी किया जिक्र

पत्र में बटरोही ने कैंची धाम के शुरुआती दौर का भी उल्लेख किया है। उन्होंने 1960 के दशक में अल्मोड़ा-नैनीताल मार्ग पर इस स्थल के चर्चित होने और इसके बाद यहां धार्मिक गतिविधियों के विस्तार की बात कही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि उस दौर की पत्रिकाओं में प्रकाशित रिपोर्टों और बहसों को भी देखा जाए, ताकि कैंची धाम से जुड़े इतिहास और समय के साथ हुए बदलावों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

नैनीताल के बदलते स्वरूप पर भी चिंता

वरिष्ठ साहित्यकार ने पत्र में नैनीताल और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते दबाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों के विस्तार के बीच स्थानीय लोगों की Peace, Safety और Quality of Life पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों से जुड़े आर्थिक लाभ के बीच आम नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को किस तरह प्राथमिकता दी जा रही है।

‘बुढ़ापे में नए कर्मकांड के लिए मजबूर न करें’

अपने पत्र के अंत में प्रो. बटरोही ने मुख्यमंत्री से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुखिया होने के नाते सरकार को आम आदमी की सुरक्षा और उसके अस्तित्व से जुड़े सवालों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने लिखा कि वे अपने जीवन के शेष समय को शांति और सुकून के साथ बिताना चाहते हैं और इसके लिए शासन से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं।

कौन हैं प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’?

प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ उत्तराखंड के चर्चित हिंदी साहित्यकार और कथाकार हैं। वे कुमाऊं विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष और प्रोफेसर रह चुके हैं। उनके लेखन में पर्वतीय जीवन, विस्थापन, सामाजिक चेतना और कुमाऊं की लोक-संस्कृति जैसे विषय प्रमुख रहे हैं।
उत्तराखंड भाषा संस्थान ने वर्ष 2023 के साहित्य पुरस्कारों के तहत उन्हें दीर्घकालीन साहित्य सृजन के लिए सुमित्रानंदन पंत पुरस्कार के लिए चुना था। 21 फरवरी 2024 को देहरादून में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाषा मंत्री सुबोध उनियाल की मौजूदगी में उन्हें सम्मानित किया गया।