Lipulekh controversy: Dispute flares up again over Lipulekh, Nepal raises questions on Kailash Mansarovar route
भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansarovar Yatra) और लिपुलेख रूट से जुड़ा हुआ है।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब Nepal ने भारत और चीन के बीच हुए समझौते पर आपत्ति जताई।
नेपाल का बयान: लिपुलेख पर फिर दावा (Lipulekh Border Issue)
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग से जुड़े किसी भी फैसले में नेपाल को शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि:
यात्रा के कई रास्ते नेपाल से होकर गुजरते हैं
लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा नेपाल का हिस्सा हैं
बिना नेपाल की सहमति कोई समझौता नहीं हो सकता
नेपाल का कहना है कि यह क्षेत्र उसकी territorial sovereignty का हिस्सा है।
भारत-चीन समझौता और मानसरोवर यात्रा (India China Agreement)
भारत और चीन के बीच संबंध सामान्य करने की कोशिशों के तहत Kailash Mansarovar Yatra को फिर से शुरू किया गया है।
India ने घोषणा की थी कि यह तीर्थयात्रा जून से अगस्त के बीच आयोजित की जाएगी।
इसके लिए दो प्रमुख route तय किए गए:
Lipulekh Pass (उत्तराखंड)
Nathu La Pass (सिक्किम)
लिपुलेख विवाद क्या है? (What is Lipulekh Dispute)
नेपाल का दावा है कि 1816 की Sugauli Treaty के अनुसार ये क्षेत्र उसके अधिकार में आते हैं।
2020 में नेपाल ने एक नया political map जारी किया था, जिसमें इन क्षेत्रों को अपने हिस्से में दिखाया गया था।
भारत का पक्ष (India’s Stand on Border Issue)
India लगातार इस दावे को खारिज करता रहा है।
भारत का कहना है:
लिपुलेख उत्तराखंड का हिस्सा है
इस क्षेत्र पर भारत का प्रशासनिक नियंत्रण लंबे समय से है
मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक route 1954 से लिपुलेख ही रहा है
नेपाल की मांग: द्विपक्षीय बातचीत (Diplomatic Talks)
नेपाल ने कहा है कि वह इस विवाद को bilateral dialogue के जरिए हल करना चाहता है।
नेपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि:
वह किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं चाहता
लेकिन सीमा विवाद पर बातचीत जरूरी है
लिपुलेख और कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर India-Nepal border dispute एक बार फिर चर्चा में है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत (diplomatic engagement) की जरूरत बढ़ती जा रही है, ताकि इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जा सके।