उत्तराखंड में बढ़ा Landslide और Flood Risk, रुद्रप्रयाग से पिथौरागढ़ तक हालात गंभीर

Uttarakhand में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य के 400 से अधिक गांव आज भी भू-धंसाव, Landslide, Flood Risk और भू-कटाव जैसी समस्याओं की जद में हैं। कई जिलों में विस्थापन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद बड़ी संख्या में परिवार अब भी सुरक्षित स्थानों पर बसाए जाने का इंतजार कर रहे हैं।

राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना नहीं, बल्कि उनकी livelihood, सामाजिक पहचान और सांस्कृतिक जड़ों को भी बचाए रखना है। सीमांत जिलों में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन कई इलाकों में geological survey, प्रशासनिक देरी और स्थानीय असहमति के कारण पुनर्वास कार्य अटका हुआ है।

Rudraprayag में 35 गांव संवेदनशील श्रेणी में

रुद्रप्रयाग जिले में 35 गांवों को आपदा की दृष्टि से sensitive zone में रखा गया है। वर्ष 2012 से 2026 के बीच 26 गांवों के 278 परिवारों को विस्थापन श्रेणी में चिन्हित किया गया। प्रशासन अब तक 21 गांवों के 246 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर चुका है, जबकि पांच गांवों के 32 परिवार अब भी relocation process का इंतजार कर रहे हैं।

Uttarkashi के 69 गांव अति संवेदनशील

उत्तरकाशी जिले के 69 गांवों को highly sensitive category में रखा गया है। पिछले एक दशक में भटवाड़ी, बड़ेथी और धराली जैसे क्षेत्रों से सैकड़ों परिवारों को विस्थापित किया गया है। इसके बावजूद करीब 147 परिवारों का rehabilitation अभी लंबित है।

Pithoragarh में तेज हुआ Rehabilitation Mission

पिथौरागढ़ जिला आपदा के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। यहां 117 गांव खतरे की जद में हैं। प्रशासन ने 700 परिवारों के पुनर्वास का लक्ष्य तय किया था, जिसमें से 627 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाया जा चुका है। हालांकि, करीब 60 परिवार अब भी राहत और पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं।

पौड़ी का पुलिंडा गांव दशकों से कर रहा इंतजार

Pauri जिले का पुलिंडा गांव 1990 के दशक से विस्थापन की मांग कर रहा है। लेकिन rehabilitation site को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच अब तक सहमति नहीं बन पाई है। वहीं नई टिहरी और धनोल्टी क्षेत्र में relocation work अपेक्षाकृत तेज गति से हुआ है।

Chamoli और Champawat में भी खतरा बरकरार

चमोली जिले के 17 गांव आपदा की दृष्टि से संवेदनशील माने गए हैं। दूसरी ओर चंपावत में 20 संवेदनशील गांवों के 112 परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है और कई परिवार नए घरों में शिफ्ट हो चुके हैं।

Nainital में कागजों में अटका विस्थापन

नैनीताल जिले के बलियानाला, मुरकुड़िया, पस्तोला और चाफी गांव नदी कटाव और Landslide Threat से जूझ रहे हैं। हालांकि यहां अब तक rehabilitation process कागजी कार्रवाई से आगे नहीं बढ़ पाई है।

Dehradun में Landslide का खतरा

देहरादून में फिलहाल किसी गांव के विस्थापन की जरूरत नहीं बताई गई है, लेकिन किमाड़ी रोड और मसूरी के आसपास के सात इलाके भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माने जा रहे हैं। वहीं Udham Singh Nagar जिले के 122 गांव Flood Sensitive Zone में हैं। बरसात के दौरान illegal construction से हालात और गंभीर हो जाते हैं।

अल्मोड़ा में Geological Survey बना बड़ी बाधा

Almora जिले के 12 गांव संवेदनशील और पांच गांव अति संवेदनशील श्रेणी में हैं। यहां 36 परिवारों का विस्थापन किया जा चुका है, लेकिन 240 परिवारों का मामला भू-गर्भीय जांच रिपोर्ट और स्थानीय असहमति के कारण अटका हुआ है। कई ग्रामीण उसी क्षेत्र में safer housing की मांग कर रहे हैं।