Pahalgam Terror Attack के बाद पहली बार खुलकर सामने आया Kasuri, लाहौर रैली में India के खिलाफ उगला ज़हर

लाहौर: पाकिस्तान एक बार फिर आतंकवाद के मंच पर बेहद शर्मनाक तरीके से बेनकाब हो गया है। पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर सैफुल्लाह कसूरी बुधवार को लाहौर में आयोजित एक रैली में भारत के खिलाफ जमकर जहर उगलता नजर आया। ISI और पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी में कसूरी ने खुद को “भारत के दिल में कांटा” बताया और यहां तक कह डाला कि अब वह इतना मशहूर हो गया है कि “अगला चुनाव मोदी के खिलाफ लड़ सकता है।”

मोदी के खिलाफ लड़ने की धमकी, लोकतंत्र का मज़ाक

कसूरी ने न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे चुनौती दी, बल्कि भारतीय लोकतंत्र का असंबद्ध मजाक भी उड़ाया। उसने कहा,

“नरेंद्र मोदी समझते हैं कि हम गोलियों से डर जाएंगे? ये उनकी भूल है।”

यही नहीं, उसने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने 1971 के युद्ध और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा पाकिस्तान के विभाजन का “बदला ले लिया है।”

मंच पर कौन-कौन था?

रैली में कसूरी के साथ मंच साझा करने वालों की लिस्ट पाकिस्तान की आतंकी संरचना को उजागर करती है:

  • हाफिज सईद का बेटा और अमेरिका द्वारा वांछित आतंकी तल्हा सईद

  • पंजाब विधानसभा के स्पीकर मलिक अहमद खान

  • ISI और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अधिकारी

  • आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट के कमांडर

तल्हा ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान के बनयान अल-मर्सूस ऑपरेशन की तारीफ करते हुए कहा:

“अल्लाह जिहाद में शामिल लोगों से प्यार करता है।”

पहलगाम हमले से पहले क्या हुआ?

कसूरी को हमले से पहले पंजाब के कंगनपुर आर्मी बेस में देखा गया था। वहां उसने पाकिस्तानी सैनिकों को भारत के खिलाफ उकसाया और ट्रेनिंग दी।
हाफिज सईद के निर्देश पर कसूरी, तल्हा सईद और शेख सज्जाद गुल ने TRF (The Resistance Front) के आतंकियों को पहलगाम में हमला करने के लिए भेजा।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान फिर बेनकाब

इस रैली और कसूरी के भाषण ने पाकिस्तान की आतंकी नीति और उसके राजनीतिक-आर्मी-आतंकी गठजोड़ को फिर उजागर कर दिया है। अमेरिका, फ्रांस और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा पहले ही TRF को भारत में Proxy War का मोहरा बताया गया है।

सैफुल्लाह कसूरी के हालिया बयान ने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में आतंकवाद सिर्फ सीमा पार युद्ध नहीं बल्कि एक राजनीतिक औजार बन चुका है। भारत को ऐसे खुले आतंकी बयानों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाकर पाकिस्तान की राजकीय आतंकी संरचना को बेनकाब करना चाहिए।