“ईरान की ललकार: ट्रंप की धमकी का मुँहतोड़ जवाब”

ट्रंप की धमकी पर ईरान का कड़ा पलटवार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी कि अगर वह परमाणु समझौते (JCPOA) पर सहमति नहीं बनाता, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप के इस बयान के बाद, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के सलाहकार अली लारीजानी ने कड़े शब्दों में पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता, लेकिन अगर ईरान की सुरक्षा को खतरा हुआ, तो वह मजबूरन इस दिशा में कदम बढ़ा सकता है।

“ईरान के पास कोई विकल्प नहीं होगा”

खामेनेई के सलाहकार ने स्पष्ट किया कि अगर अमेरिका या उसका सहयोगी इज़राइल हमला करता है, तो ईरान अपना रुख बदलने पर मजबूर होगा। एनबीसी न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने कहा था कि ईरान समझौते पर सहमत न हुआ, तो “ऐसा हमला होगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।” इस पर खामेनेई ने कहा, “अगर अमेरिका शरारत करता है, तो उसे मुँहतोड़ जवाब मिलेगा।”

संयुक्त राष्ट्र में ईरान की चेतावनी

ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत आमिर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर अमेरिका की उकसावेभरी धमकियों की निंदा की। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी आक्रामक कार्रवाई का तुरंत और कड़ा जवाब देगा।

अमेरिका की ‘अधिकतम दबाव’ नीति

2018 में ट्रंप प्रशासन ने परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया और ‘अधिकतम दबाव’ की नीति के तहत ईरान पर कठोर प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों का असर ईरान की अर्थव्यवस्था और वैश्विक वित्तीय प्रणाली से उसके अलगाव पर पड़ा।

क्या टलेगा युद्ध?

परमाणु समझौते को फिर से लागू करने के लिए 2021 में वियना में बातचीत शुरू हुई, लेकिन 2022 के बाद कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के प्रमुख ने चेतावनी दी, “जो काँच के घर में रहते हैं, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए।”

अमेरिका-ईरान संबंधों का इतिहास

1979 की ईरानी क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। 1980 के बाद से दोनों के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं रहे।