Iran-US War: Important US Missile Warning Radar damaged in Iran attack
Iran America War के बीच मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इसी बीच खबर सामने आई है कि ईरान के एक हमले में कतर में तैनात अमेरिका की एक अहम missile warning radar system को नुकसान पहुंचा है। इस सिस्टम को अमेरिकी सैन्य निगरानी नेटवर्क की “आंख” माना जाता था।
दूसरी ओर अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए Indian Ocean में एक ईरानी पोत को निशाना बनाकर डुबो दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में 80 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इन घटनाओं के बाद Middle East security situation और अधिक संवेदनशील हो गई है।
1.1 बिलियन डॉलर का था यह हाई-टेक Radar System
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 1.1 billion dollar की लागत से तैयार यह रडार सिस्टम अमेरिकी सेना के missile defense network का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस पर हमले के बाद क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी मिसाइल सुरक्षा तंत्र को बड़ा झटका लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नुकसान के कारण संभावित ballistic missile attack detection की क्षमता कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है।
Satellite Images में दिखा नुकसान
अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि satellite images से भी हुई है। Planet Labs द्वारा जारी तस्वीरों में अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (Block 5) Ballistic Missile Early Warning Radar के आसपास क्षति के संकेत दिखाई दिए हैं।
इन तस्वीरों में आग बुझाने की गतिविधियां और रडार परिसर के आसपास नुकसान के स्पष्ट निशान देखे गए हैं। यह सिस्टम मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सबसे बड़े early warning radar installations में से एक माना जाता है।
ईरान ने कैसे किया हमला?
ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने इस कार्रवाई को सटीक missile strike बताया है। हालांकि कुछ सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला संभवतः low-cost attack drone, खासकर Shahed-type drone के जरिए किया गया हो सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक मिसाइल और ड्रोन के संयुक्त हमले के दौरान यह ड्रोन अमेरिकी air defense system को भेदने में सफल रहा और रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा गया।
क्यों माना जा रहा है बड़ा नुकसान?
यह रडार सिस्टम अमेरिकी रक्षा कंपनी Raytheon द्वारा Upgraded Early Warning Radar (UEWR) program के तहत विकसित किया गया था। इसकी खासियत यह थी कि यह लगभग 5000 kilometer range तक की दूरी पर ballistic missiles और अन्य हवाई खतरों को ट्रैक कर सकता है।
कतर में इसकी लोकेशन भी रणनीतिक रूप से बेहद अहम थी। यहां से यह सिस्टम Iran, Iraq, Syria, Turkey, Central Asia और Indian Ocean region तक की गतिविधियों की निगरानी कर सकता था।
अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और पेंटागन के पूर्व सलाहकार Colonel Douglas Macgregor ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इस हमले में अमेरिका की “eyes in the region” को निशाना बनाया गया है। वहीं भू-राजनीति विशेषज्ञ Brian Allen के अनुसार इसका असर केवल एक सैन्य ठिकाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके strategic implications भी हो सकते हैं।
तुरंत बदलना आसान नहीं
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के पास satellite surveillance system और अन्य रडार नेटवर्क मौजूद हैं, लेकिन AN/FPS-132 जैसे बड़े और स्थायी रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचना क्षेत्रीय निगरानी में एक गैप पैदा कर सकता है।
ऐसे बड़े early warning radar systems को दोबारा स्थापित करने में लंबा समय लगता है। इस कारण कुछ समय के लिए missile tracking capability कमजोर हो सकती है।
यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कई प्रमुख सैन्य ठिकाने मौजूद हैं और यहीं से गुजरते हैं दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण global energy supply routes और समुद्री व्यापार मार्ग।