चीन की बढ़ती चुनौती के बीच भारत की नई रणनीति, हिंद-प्रशांत में मजबूत हो रही रक्षा साझेदारी

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत अपनी विदेश और रक्षा नीति को नए सिरे से मजबूत कर रहा है। सरकार एक ऐसी रणनीति पर काम कर रही है जिसमें एक ओर क्षेत्रीय देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्यात को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। हाल के महीनों में ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, सेशेल्स और अन्य साझेदार देशों के साथ बढ़ते सहयोग को इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के साथ बढ़ा रक्षा सहयोग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। इसमें सैन्य अनुसंधान, रक्षा नवाचार, संयुक्त परियोजनाओं और समुद्री सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। वहीं, इंडोनेशिया के साथ भी रक्षा साझेदारी को विस्तार देने और सामरिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कई पहलें सामने आई हैं।

समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक उपस्थिति पर विशेष जोर

भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने पर लगातार ध्यान दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारियों के माध्यम से भारत अपनी सामरिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

रक्षा निर्यात के साथ साझेदारी को भी मिल रही मजबूती

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की रणनीति केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है। देश स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के साथ-साथ मित्र देशों को रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दे रहा है। इससे एक ओर रक्षा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय देशों के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक संबंध भी मजबूत होंगे।

चीन से प्रभावित देशों पर विशेष ध्यान

विश्लेषकों का मानना है कि भारत उन देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सामरिक साझेदारियों को विविध बनाना चाहते हैं। इस दिशा में श्रीलंका, इंडोनेशिया, सिंगापुर और सेशेल्स जैसे देशों के साथ बढ़ते संपर्क को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बहुपक्षीय मंचों के साथ द्विपक्षीय रिश्तों पर भी जोर

भारत Quad, ASEAN और अन्य क्षेत्रीय मंचों में अपनी सक्रिय भूमिका बनाए रखने के साथ-साथ अलग-अलग देशों के साथ द्विपक्षीय रक्षा और आर्थिक संबंधों को भी मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बहुपक्षीय और द्विपक्षीय दोनों स्तरों पर संतुलित रणनीति अपनाकर भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहता है।