HC upset over detentions ahead of Parliament March; raises serious questions about police action.
Sonam Wangchuk Protest से जुड़े एक मामले में Uttarakhand High Court ने राज्य पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (UPP) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को दिल्ली जाने के दौरान हिरासत में लिए जाने के मामले में पुलिस से कार्रवाई का कानूनी आधार पूछा और सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणियां कीं।
मामला उस समय सामने आया जब प्रभात ध्यानी कथित तौर पर Parliament March में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे थे।
अदालत ने पुलिस के अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पुलिस से पूछा कि यदि संभावित रूप से किसी आदेश का उल्लंघन दिल्ली में होना था, तो उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें रास्ते में हिरासत में किस कानूनी अधिकार के तहत लिया।
अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस का दायित्व नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। साथ ही पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उसके कानूनी औचित्य पर सवाल उठाए।
सरकार से मांगा जवाब
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से प्रभात ध्यानी को हिरासत में लेने का आधार स्पष्ट करने को कहा गया। इसके जवाब में सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें बाद में रिहा कर दिया गया है।
हालांकि, अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम पर असंतोष जताया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल बनाए रखे।
क्या है पूरा मामला?
याचिका के अनुसार, 19 जुलाई की शाम प्रभात ध्यानी को Rishikesh Railway Station पर उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह ट्रेन से दिल्ली रवाना हो रहे थे। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर Sonam Wangchuk के आंदोलन का समर्थन किया था और Jantar Mantar से संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल होने की जानकारी दी थी।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि हिरासत के बाद उनके परिवार को उनकी लोकेशन की जानकारी नहीं दी गई और प्रारंभिक स्तर पर उन्हें रिहा करने से भी इनकार किया गया।
दिल्ली हाई कोर्ट में भी पहुंचा प्रदर्शन का मामला
इधर, Delhi High Court ने संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर Public Interest Litigation (PIL) पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया।
अदालत अब इस मामले में दायर याचिका में लगाए गए आरोपों और मांगी गई राहतों पर सुनवाई करेगी।
मामले पर आगे रहेगी नजर
एक ओर उत्तराखंड हाई कोर्ट हिरासत की वैधता पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली हाई कोर्ट प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा करेगा। ऐसे में दोनों मामलों की आगामी सुनवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।