Ground Report Bengal: Problems with 'unmapped voters' in SIR hearings, elderly and pregnant women facing hardship.
West Bengal SIR Hearings News के बीच राज्य के अलग-अलग जिलों से गंभीर और चिंताजनक घटनाएं सामने आ रही हैं। Special Intensive Revision (SIR) of Electoral Rolls से जुड़ी सुनवाई प्रक्रिया के दौरान कई बुजुर्गों की मौत और सैकड़ों मतदाताओं के मानसिक तनाव में होने की खबरों ने प्रशासन और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुरुलिया जिले के पारा इलाके में 82 वर्षीय दुर्जन माझी ने सोमवार सुबह रेलवे ट्रैक पर कूदकर जान दे दी। यह घटना उनकी निर्धारित SIR hearing से करीब पांच घंटे पहले हुई। परिजनों के अनुसार, उनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं था, जबकि 2002 की मतदाता सूची में नाम दर्ज था। सुनवाई नोटिस मिलने के बाद से वे लगातार तनाव में थे।
इसी तरह हावड़ा के अमता क्षेत्र में 75 वर्षीय जमात अली की मौत हो गई। बताया गया कि सुनवाई नोटिस मिलने के कुछ घंटों बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। जिला प्रशासन ने कहा है कि व्यक्ति पहले से बीमार था, लेकिन परिजनों का आरोप है कि SIR notice stress ने स्थिति और खराब कर दी। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
नादिया जिले के कल्याणी में 72 वर्षीय जहरलाल महतो की भी कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। वे SIR सुनवाई में शामिल हुए थे और उसके बाद से मानसिक रूप से परेशान बताए जा रहे थे। परिवार का कहना है कि उनका नाम भी 2002 voter list में था, इसके बावजूद उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया।
SIR hearings के तीसरे दिन राज्यभर में ऐसे मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिन्हें “unmapped voters” की श्रेणी में रखा गया है। कूचबिहार के दिनहाटा ब्लॉक कार्यालय में 96 वर्षीय निखिल चंद्र सरकार अपनी पत्नी और बेटे के साथ सुनवाई के लिए पहुंचे। उम्र और बीमारियों के कारण वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। उन्होंने कहा कि वे अपने पास मौजूद सभी दस्तावेज जमा करा चुके हैं, फिर भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पूर्व बर्धमान के कटवा ब्लॉक कार्यालय में 90 वर्षीय बिस्तर पर रहने वाली महिला मुक्तिबाला परमानिक को भी सुनवाई के लिए लाया गया। परिवार ने इसे “harassment of elderly voters” बताया। प्रशासन का कहना है कि लिखित दिशा-निर्देश नहीं मिले थे, फिर भी बुजुर्गों को राहत देने के लिए मौखिक निर्देश जारी किए गए हैं।
उत्तर 24 परगना के टाकी इलाके में आठ महीने की गर्भवती महिला सुप्रिया मंडल सुनवाई के दौरान लंबी लाइन में खड़े-खड़े बेहोश हो गईं। परिवार का आरोप है कि इतनी उन्नत गर्भावस्था में घंटों इंतजार कराना health risk है। उनका नाम 2002 की वोटर लिस्ट में नहीं होने के कारण सुनवाई के लिए बुलाया गया था।
कोलकाता में भी हालात कुछ अलग नहीं दिखे। एक महिला अपने तीन महीने के बच्चे के साथ सुनवाई केंद्र पहुंची। परिवार के अनुसार, enumeration form भरते समय हुई एक छोटी सी गलती के कारण उन्हें SIR hearing mismatch के नाम पर बुलाया गया।
इन घटनाओं के बाद चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि 85 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार मतदाताओं के लिए home verification by BLOs की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है, बशर्ते इसके लिए अनुरोध किया जाए। हालांकि जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था के क्रियान्वयन को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।