First World War का वीर नायक: दरबान सिंह नेगी की बहादुरी से दंग रह गए थे ब्रिटिश किंग

आज जब दुनिया Russia-Ukraine war और Middle East conflict जैसे आधुनिक युद्धों की भयावहता देख रही है, तब इतिहास के पन्नों में दर्ज कुछ ऐसे सैनिक भी हैं जिन्होंने सीमित तकनीक और साधनों के बावजूद अद्भुत साहस दिखाया।

ऐसे ही एक महान योद्धा थे Darban Singh Negi, जो भारतीय सेना की प्रसिद्ध Garhwal Rifles के वीर सैनिक थे। उनकी वीरता की गूंज First World War के दौरान यूरोप से लेकर लंदन तक सुनाई दी थी।

उत्तराखंड की धरती से निकला एक महान सैनिक

दरबान सिंह नेगी का जन्म 4 मार्च 1883 को Chamoli में हुआ था। पहाड़ी क्षेत्र से आने वाले नेगी ने ब्रिटिश भारतीय सेना में शामिल होकर अपने साहस और नेतृत्व से अलग पहचान बनाई।

जब World War I शुरू हुआ, तब उन्हें यूरोप के युद्धक्षेत्र में भेजा गया, जहां उन्होंने अपनी वीरता से इतिहास रच दिया।

Festubert Battle में दिखाई अदम्य बहादुरी

नवंबर 1914 में फ्रांस के Festubert सेक्टर में जर्मन सेना ने ब्रिटिश सेना की कई अग्रिम चौकियों पर कब्जा कर लिया था। इन चौकियों को वापस हासिल करने की जिम्मेदारी 1/39th Garhwal Rifles Battalion को दी गई।

23-24 नवंबर की रात जब हमला शुरू हुआ, तब नायक दरबान सिंह नेगी अपनी टुकड़ी के साथ सबसे आगे थे। दुश्मन ने कांटेदार तारों और मशीनगनों से मजबूत सुरक्षा घेरा बना रखा था।

घायल होने के बावजूद दुश्मनों पर टूट पड़े

हमले के दौरान नेगी पर grenades और bullets की लगातार बौछार हो रही थी। उनके सिर और बांह में गंभीर चोटें आईं, लेकिन उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया।

वह अकेले ही दुश्मन की खाइयों में कूद पड़े और hand-to-hand combat में जर्मन सैनिकों का मुकाबला करने लगे। उनके साहस को देखकर साथियों में भी नया जोश भर गया।

सुबह तक उनके नेतृत्व में Garhwal Rifles ने सभी खोई हुई चौकियों पर फिर से कब्जा कर लिया।

Victoria Cross से सम्मानित

दरबान सिंह नेगी की वीरता की खबर ब्रिटेन तक पहुंची। उस समय ब्रिटिश साम्राज्य का सबसे बड़ा सैन्य सम्मान Victoria Cross था।

5 दिसंबर 1914 को फ्रांस के Saint-Omer में आयोजित विशेष समारोह में ब्रिटेन के सम्राट King George V ने स्वयं नेगी को यह सम्मान प्रदान किया।

वह Victoria Cross प्राप्त करने वाले दूसरे भारतीय सैनिक थे, जबकि पहले सैनिक Khudadad Khan थे। लेकिन किंग जॉर्ज के हाथों यह सम्मान पाने वाले नेगी पहले भारतीय बने।

जब King George V ने पूछा – “तुम्हारी क्या ख्वाहिश है?”

नेगी की वीरता से प्रभावित होकर किंग जॉर्ज ने उनसे पूछा कि वह अपनी कोई इच्छा बताएं।

इस अवसर पर दरबान सिंह नेगी ने कोई व्यक्तिगत मांग नहीं रखी, बल्कि अपने क्षेत्र के विकास की बात कही।

उन्होंने दो प्रमुख मांगें रखीं:

उनके गृह क्षेत्र में एक school खोला जाए

पहाड़ी इलाकों को जोड़ने के लिए Rishikesh–Karnaprayag Railway Line बनाई जाए

बाद में ब्रिटिश सरकार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए Karnaprayag में एक High School की स्थापना की।

आज भी प्रेरणा हैं दरबान सिंह नेगी

दरबान सिंह नेगी की कहानी सिर्फ एक सैनिक की बहादुरी नहीं, बल्कि देशभक्ति, नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा की मिसाल है।

Indian Military History में उनका नाम उन वीर सैनिकों में शामिल है जिन्होंने अपने साहस से पूरी दुनिया को दिखाया कि भारतीय सैनिक किसी भी युद्धभूमि में असाधारण पराक्रम दिखा सकते हैं।