Explainer: $50 billion trade gap and tariff barriers—where exactly is the India-US trade deal stuck?
India-US Trade Deal को लेकर पिछले कई महीनों से दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है। दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच प्रस्तावित यह समझौता वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि कई दौर की बैठकों और सकारात्मक बयानों के बावजूद अभी तक यह डील अंतिम रूप नहीं ले सकी है।
हाल के दिनों में अमेरिकी सांसदों और अधिकारियों के बयानों से साफ संकेत मिले हैं कि दोनों देशों के बीच कुछ बड़े मुद्दे अब भी समाधान का इंतजार कर रहे हैं।
कैसे शुरू हुई बातचीत?
भारत और अमेरिका ने फरवरी 2025 में औपचारिक रूप से Bilateral Trade Agreement (BTA) पर बातचीत शुरू की थी। इसके बाद फरवरी 2026 में एक अंतरिम समझौते (Interim Trade Agreement) का ढांचा तैयार करने पर सहमति बनी।
दोनों देशों का लक्ष्य व्यापार बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और बाजारों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने का था। लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण बातचीत लंबी खिंचती चली गई।
50 अरब डॉलर का Trade Imbalance क्यों बना मुद्दा?
अमेरिकी सांसद रोजर मार्शल ने हाल ही में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में लगभग 50 अरब डॉलर का असंतुलन (Trade Deficit) मौजूद है।
अमेरिका का मानना है कि भारत को अमेरिकी उत्पादों और सेवाओं के लिए अपने बाजार को और अधिक खोलना चाहिए। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि यदि भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार भारतीय वस्तुओं को अधिक अवसर दे, तो भारतीय बाजार में भी अमेरिकी कंपनियों को समान अवसर मिलने चाहिए।
यही व्यापार संतुलन का मुद्दा मौजूदा वार्ता की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है।
Tariff Barrier पर क्यों है विवाद?
अमेरिका लंबे समय से भारत के आयात शुल्क (Import Tariffs) को लेकर चिंता जताता रहा है।
अमेरिकी उद्योगों का कहना है कि भारत में कई उत्पादों पर लगने वाले शुल्क वैश्विक औसत से अधिक हैं, जिससे अमेरिकी निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाई होती है।
जैसे क्षेत्रों में अमेरिका अधिक Market Access चाहता है।
दूसरी ओर भारत का कहना है कि घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की रक्षा करना भी जरूरी है। यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं हो रहा।
दिल्ली में क्यों हो रही हैं लगातार बैठकें?
समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) और भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी लगातार बैठकें कर रहे हैं।
नई दिल्ली में हुई हालिया बैठकों में:
Market Access
Tariff Reduction
Energy Trade
Technology Cooperation
Agriculture Imports
जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
अंतरिम समझौते में क्या प्रस्ताव था?
फरवरी 2026 में तैयार किए गए प्रारंभिक ढांचे के अनुसार:
अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क में बड़ी कटौती करने को तैयार था।
भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर शुल्क कम करने पर विचार कर रहा था।
ऊर्जा, विमानन, प्रौद्योगिकी और कोकिंग कोल जैसे क्षेत्रों में व्यापार बढ़ाने की योजना बनाई गई थी।
भारत ने आने वाले वर्षों में अमेरिकी उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीद का संकेत दिया था।
Trump Tariff Policy ने कैसे बदला समीकरण?
व्यापार वार्ता के दौरान अमेरिकी टैरिफ नीति में भी बड़ा बदलाव हुआ।
अमेरिकी न्यायिक फैसलों और बाद की प्रशासनिक कार्रवाइयों के चलते कई प्रस्तावित शुल्क संरचनाएं बदल गईं। इससे दोनों देशों को समझौते के कई बिंदुओं पर दोबारा विचार करना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ नीति में आए बदलावों ने बातचीत को और जटिल बना दिया है।
भारत को क्या फायदा होगा?
यदि यह समझौता सफल होता है तो भारत को कई बड़े लाभ मिल सकते हैं:
अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच
Export Growth में तेजी
Manufacturing Sector को बढ़ावा
Foreign Investment में वृद्धि
Technology Transfer के नए अवसर
इसके अलावा भारत के “Make in India” और “Viksit Bharat” जैसे अभियानों को भी मजबूती मिल सकती है।
अमेरिका क्या चाहता है?
अमेरिका की प्रमुख मांगें हैं:
भारतीय बाजार में आसान प्रवेश
कम Import Duty
कृषि और खाद्य उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच
Digital Trade में स्पष्ट नियम
अमेरिकी कंपनियों के लिए कम Regulatory Barriers
आगे क्या हो सकता है?
दोनों देशों के नेताओं और अधिकारियों के बयानों से संकेत मिलते हैं कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि Trade Deficit, Tariff Structure और Market Access जैसे मुद्दों पर अंतिम सहमति बनना अभी बाकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष कुछ प्रमुख मुद्दों पर समझौता कर लेते हैं तो आने वाले महीनों में India-US Interim Trade Deal को अंतिम रूप दिया जा सकता है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।