MPLADS report sparks political storm; shocking record of spending by rebel MPs.
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों के दावों पर अब सवाल उठने लगे हैं। जिन सांसदों ने अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिलने का आरोप लगाया था, उनके खर्च से जुड़े आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
केंद्र सरकार की MPLADS (Member of Parliament Local Area Development Scheme) वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन सांसदों के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि मौजूद थी, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं किया गया।
100 करोड़ रुपये से अधिक फंड, खर्च हुआ बेहद कम
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत प्रत्येक सांसद को हर साल 5 करोड़ रुपये का फंड दिया जाता है। यदि राशि पूरी तरह खर्च नहीं होती तो उसे अगले वित्तीय वर्ष में जोड़ दिया जाता है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इन छह सांसदों के पास पिछले कुछ वर्षों में करीब 100 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध था। इसके बावजूद कई सांसदों ने कुल राशि का बेहद छोटा हिस्सा ही उपयोग किया। कुछ मामलों में खर्च का प्रतिशत 2 से 25 फीसदी के बीच ही रहा।
इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने बागी सांसदों के उस तर्क पर सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय विकास के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिलने की बात कही थी।
किस सांसद ने कितना किया फंड का उपयोग?
नागेश पाटिल-अष्टिकर (हिंगोली)
इन सांसदों में सबसे अधिक खर्च करने वाले नागेश पाटिल-अष्टिकर रहे। उन्होंने उपलब्ध राशि का लगभग 27 प्रतिशत उपयोग किया। हालांकि उनके अधिकांश विकास कार्य अभी भी निर्माणाधीन हैं।
संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ-ईस्ट)
फंड उपयोग के मामले में सबसे कमजोर प्रदर्शन संजय दीना पाटिल का रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उन्होंने कुल राशि का लगभग 1 प्रतिशत ही खर्च किया। उनके अधिकांश प्रस्तावित प्रोजेक्ट अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।
ओमराजे निंबालकर (धाराशिव)
इन्होंने कई विकास योजनाओं का प्रस्ताव रखा, लेकिन उनमें से बड़ी संख्या अभी भी अधूरी या निर्माणाधीन है।
संजय जाधव (परभणी)
इनके क्षेत्र में भी कई परियोजनाएं अभी लंबित हैं। केवल सीमित संख्या में कार्य पूरे हो सके हैं।
भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)
सबसे अधिक प्रस्तावित परियोजनाओं में शामिल होने के बावजूद इनके अधिकांश प्रोजेक्ट अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।
संजय देशमुख (यवतमाल)
इन्होंने भी बड़ी संख्या में विकास कार्यों की सिफारिश की, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं अभी प्रगति पर हैं।
सांसदों ने दी अपनी सफाई
आंकड़े सामने आने के बाद कुछ सांसदों ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है। उनका कहना है कि MPLADS फंड और राज्य सरकार या जिला योजना समिति (DPTC) के फंड अलग-अलग होते हैं।
हिंगोली सांसद नागेश पाटिल-अष्टिकर का कहना है कि लोकसभा क्षेत्र के व्यापक विकास के लिए सांसद निधि पर्याप्त नहीं होती। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए राज्य सरकार और अन्य एजेंसियों के सहयोग की आवश्यकता होती है।
वहीं ओमराजे निंबालकर ने कहा कि केवल हाल के वर्षों के आधार पर मूल्यांकन करना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अपने पिछले कार्यकाल के दौरान उन्होंने उपलब्ध फंड का पूरा उपयोग किया था।
संजय राउत का तीखा हमला
इस पूरे मुद्दे पर शिवसेना (UBT) नेता Sanjay Raut ने बागी सांसदों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब करोड़ों रुपये का फंड उपलब्ध था और उसका उपयोग नहीं किया गया, तो फंड की कमी का आरोप कैसे लगाया जा सकता है।
राउत ने सवाल उठाया कि यदि विकास कार्यों के लिए धन की कमी थी तो उपलब्ध सांसद निधि का पूरा इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। उन्होंने इसे दल-बदल के लिए दिया गया राजनीतिक तर्क बताया।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ सकता है विवाद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। एक ओर शिंदे गुट अपनी ताकत बढ़ाने में जुटा है, वहीं उद्धव ठाकरे खेमे को इस खुलासे से नया राजनीतिक हथियार मिल गया है।
अब बहस इस बात पर केंद्रित हो गई है कि क्या वास्तव में फंड की कमी बगावत की वजह थी या इसके पीछे सत्ता और राजनीतिक भविष्य से जुड़े बड़े समीकरण काम कर रहे थे। महाराष्ट्र की सियासत में यह सवाल आने वाले समय में और भी महत्वपूर्ण बन सकता है।