उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा पर जोर, रेड लाइट जंप और मोबाइल इस्तेमाल करने वालों पर सख्ती की मांग

उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नई व्यवस्था लागू करने की मांग उठी है। जन जागरण अभियान समिति ने प्रदेश के सभी पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट आने वाले दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं देने का सुझाव दिया है। संस्था का मानना है कि इस कदम से लोगों को हेलमेट पहनने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।

सामाजिक कार्यकर्ता स्वप्निल सिन्हा ने यातायात निदेशक को सौंपा पत्र

जन जागरण अभियान समिति के संस्थापक एवं अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता स्वप्निल सिन्हा ने यातायात निदेशक कृष्ण कुमार वीके से मुलाकात कर इस संबंध में पत्र सौंपा। उन्होंने प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं का हवाला देते हुए यातायात विभाग से प्रभावी कदम उठाने की अपील की।

सिन्हा के अनुसार, दोपहिया वाहन चालकों के साथ पीछे बैठने वाले व्यक्ति भी सड़क हादसों के दौरान गंभीर जोखिम का सामना करते हैं। हेलमेट नहीं पहनने की स्थिति में दुर्घटना होने पर सिर में गंभीर चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। इसके बावजूद कई लोग बिना हेलमेट वाहन चलाते हैं और यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं।

बिना हेलमेट पेट्रोल देने पर रोक लगाने का सुझाव

स्वप्निल सिन्हा ने मांग की कि यातायात विभाग या संबंधित जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पेट्रोल पंप संचालकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें। इसके तहत बिना हेलमेट दोपहिया वाहन लेकर आने वाले चालकों को पेट्रोल नहीं देने की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है।

उनका कहना है कि यदि पेट्रोल पंपों पर इस तरह की व्यवस्था लागू होती है, तो दोपहिया वाहन चालकों में हेलमेट पहनने की आदत को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, फिलहाल यह एक सुझाव और मांग है। यातायात विभाग की ओर से इसे लागू करने के संबंध में किसी आधिकारिक आदेश की जानकारी सामने नहीं आई है।

रेड लाइट जंप और मोबाइल इस्तेमाल करने वालों पर भी सख्ती की मांग

समिति ने हेलमेट के अलावा यातायात नियमों के अन्य उल्लंघनों पर भी सख्ती बरतने की अपील की है। स्वप्निल सिन्हा ने विशेष रूप से युवा दोपहिया वाहन चालकों की ओर से रेड लाइट जंप करने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने और तेज गति से वाहन चलाने जैसी लापरवाहियों पर चिंता जताई।

उन्होंने पुलिस और यातायात विभाग से ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने का आग्रह किया, ताकि सड़क हादसों की आशंका कम की जा सके।

‘सुरक्षा के लिए जरूरी है यातायात नियमों का पालन’

स्वप्निल सिन्हा ने कहा कि यातायात नियमों का पालन केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। उनके मुताबिक, प्रशासन, पुलिस, यातायात विभाग और पेट्रोल पंप संचालक मिलकर काम करें तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली गंभीर चोटों और जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यातायात विभाग इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करेगा और प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाएगा।

फिलहाल उत्तराखंड में बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं देने की व्यवस्था लागू होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस प्रस्ताव पर यातायात विभाग की ओर से आने वाले फैसले पर नजर रहेगी।