Durgadi Fort Controversy: मंदिर, नमाज़ और राजनीति… क्यों सुलगा कल्याण?

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण स्थित करीब 450 साल पुराने दुर्गाड़ी किले (Durgadi Fort) में एक बार फिर धार्मिक और राजनीतिक तनाव देखने को मिला। बकरीद के मौके पर किले में स्थित मंदिर में कुछ समय के लिए प्रवेश रोकने के फैसले के बाद विवाद बढ़ गया और शिवसेना के दोनों गुट—उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे समर्थक—एक साथ विरोध में उतर आए।

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हो गई। इसके बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

क्यों शुरू हुआ विवाद?

हर साल बकरीद के दौरान किले के पास सड़क पर नमाज़ अदा की जाती है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन कुछ समय के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की एंट्री रोक देता है।

हालांकि इस बार हिंदू संगठनों और शिवसेना कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि नमाज़ के दौरान भी मंदिर में दर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए। इसी मुद्दे ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया।

शिवसेना के दोनों गुटों ने किया विरोध

इस मुद्दे पर शिवसेना (UBT) और शिंदे गुट दोनों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उद्धव ठाकरे गुट के नेता विजय साल्वी के नेतृत्व में “घंटानाद आंदोलन” और महाआरती का आयोजन किया गया।

वहीं बीजेपी और शिंदे गुट से जुड़े नेताओं ने भी सड़क पर नमाज़ और मंदिर बंद करने के फैसले का विरोध जताया। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने कई इलाकों में बैरिकेडिंग की और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया।

क्या है दुर्गाड़ी किले का इतिहास?

Durgadi Fort महाराष्ट्र के कल्याण शहर में स्थित एक ऐतिहासिक किला है, जो मुंबई से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में आदिलशाही शासन के दौरान हुआ था।

बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस किले पर कब्जा किया और यहां दुर्गा माता का मंदिर स्थापित कराया। यही वजह है कि यह स्थान हिंदू आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय का दावा है कि किले के भीतर मौजूद ढांचा मस्जिद और ईदगाह से जुड़ा हुआ है। इसी कारण यह जगह लंबे समय से धार्मिक विवाद का केंद्र बनी हुई है।

अदालत में क्या है मामला?

दुर्गाड़ी किले को लेकर करीब 48 साल तक कानूनी लड़ाई चली। कल्याण सिविल कोर्ट ने अपने फैसले में इस जगह को राज्य सरकार की संपत्ति माना और मुस्लिम पक्ष की वक्फ बोर्ड से जुड़ी याचिका खारिज कर दी।

हालांकि मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी है। फिलहाल जिला अदालत ने मामले में “यथास्थिति” बनाए रखने का आदेश दिया हुआ है। इसका मतलब है कि अंतिम फैसला आने तक विवादित स्थल पर कोई नया निर्माण या बदलाव नहीं किया जा सकता।

क्यों अहम है यह विवाद?

दुर्गाड़ी किला सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी खास महत्व रखता है। माना जाता है कि शिवसेना की शुरुआती हिंदुत्व राजनीति को इसी इलाके से मजबूती मिली थी।

अब एक बार फिर यह किला हिंदू-मुस्लिम राजनीति, धार्मिक अधिकार और चुनावी रणनीति का बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह मामला महाराष्ट्र की सियासत में और ज्यादा गर्मा सकता है।