Direction of Bhagirathi River changed, danger signs in Harsil Valley, administration alert
Uttarakhand Monsoon शुरू होने से पहले ही उत्तरकाशी जिले की प्रसिद्ध Harsil Valley एक बार फिर खतरे के साये में आ गई है। Bhagirathi River का जलस्तर बढ़ने और नदी का बहाव बदलने से हर्षिल की आवासीय बस्तियों, सेब के बागानों और कई सरकारी भवनों पर भू-कटाव का खतरा गहरा गया है। स्थानीय लोग समय रहते स्थायी सुरक्षा कार्य पूरा करने की मांग कर रहे हैं।
नदी का बदला बहाव, आवासीय क्षेत्र तक पहुंचा खतरा
जानकारी के मुताबिक, भागीरथी नदी को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया अस्थायी मलबे का टीला तेज बहाव में बह गया। इसके बाद नदी का रुख सीधे आबादी वाले इलाके की ओर मुड़ गया है।
स्थिति यह है कि GMVN Guest House का टिनशेड बह चुका है, जबकि पुलिस चौकी, थाना भवन, कई मकानों, सेब के बगीचों और सेना के कैंप के आसपास लगातार कटाव बढ़ रहा है।
पिछले साल भी आई थी विनाशकारी आपदा
अगस्त 2025 में Harsil-Dharali Disaster ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। धराली गांव में बादल फटने के बाद खीरगंगा नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कई मकानों को बहा दिया था। इस आपदा में कई लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग लापता हो गए थे।
घटना के बाद सेना के 250 से अधिक जवानों ने कई दिनों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर राहत और बचाव कार्य किया था।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लगाए लापरवाही के आरोप
हर्षिल की ग्राम प्रधान सुचित रौतेला और स्थानीय निवासी जयवीर नेगी का आरोप है कि पिछले साल की आपदा को लगभग 11 महीने बीत जाने के बावजूद स्थायी सुरक्षा कार्य अभी तक पूरे नहीं हो सके हैं।
उनका कहना है कि आपदा के दौरान बनी झील को पूरी तरह नहीं खोला गया और नदी को मोड़ने के लिए बनाया गया अस्थायी टीला भी बह गया। इससे अब पूरा नदी प्रवाह आबादी की ओर आ गया है, जिससे खतरा कई गुना बढ़ गया है।
प्रशासन ने मौके पर भेजी संयुक्त टीम
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने आपदा प्रबंधन और सिंचाई विभाग को तत्काल मौके पर पहुंचकर सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए हैं।
रविवार को जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने हर्षिल पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और नुकसान का आकलन किया।
10 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा सुरक्षा कार्य
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सचिन सिंघल के अनुसार, हर्षिल में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से River Protection Project पर काम चल रहा है।
इस परियोजना के तहत भागीरथी नदी के किनारे RCC Retaining Wall बनाई जा रही है ताकि भविष्य में कटाव को रोका जा सके। विभाग का दावा है कि यह कार्य अगले एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
Monsoon से पहले बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून के दौरान भागीरथी नदी का जलस्तर और बढ़ता है तो हर्षिल घाटी में कटाव का खतरा और गंभीर हो सकता है। ऐसे में स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द स्थायी सुरक्षा इंतजाम पूरे करने की मांग कर रहे हैं ताकि पिछले साल जैसी त्रासदी दोबारा न दोहराई जाए।