Dilip Ghosh News: ममता से मुलाकात के बाद अमित शाह की रैली से दूरी, BJP में नई हलचल?

West Bengal BJP की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के सीनियर नेता दिलीप घोष (Dilip Ghosh) लगातार दूसरी बार किसी बड़े कार्यक्रम से नदारद रहे हैं। पहले पीएम मोदी की रैली और अब Amit Shah Kolkata Rally से दूरी ने कई राजनीतिक अटकलों को जन्म दे दिया है। क्या दिलीप घोष अब पार्टी की रणनीति से बाहर हैं या कोई और खेल चल रहा है?

दिलीप घोष की गैरमौजूदगी पर सवाल

रविवार को कोलकाता में हुई बीजेपी की महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी थी, लेकिन दिलीप घोष गायब थे। इससे पहले 29 मई को अलीपुरद्वार में मोदी की रैली में भी वे नहीं दिखे थे। दिलीप घोष की ये लगातार दूसरी ‘गैरहाजिरी’ अब चर्चा का विषय बन चुकी है।

ममता बनर्जी से मुलाकात बनी आग में घी

इस पूरी हलचल की जड़ है Digha Jagannath Mandir उद्घाटन के दौरान दिलीप घोष की CM Mamata Banerjee से मुलाकात। इस भेंट के बाद TMC और BJP दोनों खेमों में हलचल मच गई।

BJP कार्यकर्ताओं ने घोष पर TMC से नजदीकी बढ़ाने का आरोप लगाया, तो वहीं घोष ने सफाई देते हुए कहा:

“मैं किसी भी धार्मिक स्थल पर जा सकता हूं, यह मेरा अधिकार है। मेरी निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल उठाना अनुचित है।” हालांकि इसके बावजूद पार्टी की बैठकों से उनकी दूरी और उन्हें कार्यक्रमों में न बुलाया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। “नहीं बुलाया गया, फर्क नहीं पड़ता”: दिलीप घोष का बयान

1 जून की बैठक को लेकर दिलीप घोष ने कहा:

“मुझे अमित जी के कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया। कोई बात नहीं। अब मैं जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ रहना पसंद करता हूं।” यही बात उन्होंने 29 मई को पीएम मोदी की रैली से पहले भी दोहराई थी।

BJP नेतृत्व की चुप्पी, बढ़ा सस्पेंस

जब पत्रकारों ने प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार से दिलीप घोष की अनुपस्थिति पर सवाल किया तो उन्होंने टालते हुए कहा:

“दिलीप दा वरिष्ठ नेता हैं, मैं इस पर टिप्पणी नहीं करूंगा।”

इस प्रतिक्रिया ने कयासों को और हवा दी है कि शायद पार्टी के भीतर ही घोष की भूमिका को सीमित किया जा रहा है।

Political Speculation: क्या दिलीप घोष पार्टी से अलग होंगे?

क्या BJP अब दिलीप घोष को हाशिये पर डाल रही है?

क्या TMC के साथ उनका समीकरण बनने जा रहा है?

क्या घोष राज्य नेतृत्व से नाराज़ हैं और यह उनकी रणनीतिक दूरी है?

ये सवाल अब बंगाल की राजनीति में चर्चा के केंद्र में हैं।