Crypto Diplomacy Explained: Pakistan ने World Liberty Financial से समझौता क्यों किया?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के वर्ष 2025 के वित्तीय खुलासे में उनकी फैमिली की Crypto Venture World Liberty Financial (WLF) सबसे ज्यादा चर्चा में रही। दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी ने केवल Token Sales से ही 500 मिलियन डॉलर (लगभग 50 करोड़ डॉलर) से अधिक की कमाई की।

इसी दौरान Pakistan उन शुरुआती देशों में शामिल रहा, जिसने World Liberty Financial के साथ समझौता किया। हालांकि अब तक इस साझेदारी के तहत कोई बड़ा Crypto Project शुरू नहीं हुआ है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान को इस समझौते से राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण लाभ मिला।

Pakistan ने किया था USD1 Stablecoin पर समझौता

जनवरी 2026 में पाकिस्तान के Finance Ministry ने World Liberty Financial की सहयोगी कंपनी SC Financial Technologies के साथ Memorandum of Understanding (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।

इस समझौते का उद्देश्य USD1 Stablecoin के जरिए Cross-Border Payments की संभावनाओं का अध्ययन करना था। इस दौरान प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif, सेना प्रमुख Field Marshal Asim Munir और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था।

हालांकि लगभग छह महीने बाद भी न तो कोई Pilot Project शुरू हुआ, न किसी कंपनी को लाइसेंस मिला और न ही USD1 के जरिए किसी लेनदेन की पुष्टि हुई।

Stablecoin क्या है?

Stablecoin ऐसी डिजिटल करेंसी होती है, जिसकी कीमत आमतौर पर अमेरिकी डॉलर जैसी किसी स्थिर मुद्रा से जुड़ी रहती है। इसका उद्देश्य इंटरनेट के माध्यम से तेज और अपेक्षाकृत स्थिर Digital Payments उपलब्ध कराना होता है।

USD1 World Liberty Financial का Stablecoin है, जिससे होने वाले लेनदेन के आधार पर कंपनी को आय होती है।

Pakistan पहले से बड़ा Crypto Market

Pakistan पहले ही दुनिया के सबसे बड़े Crypto Markets में गिना जाता है। Chainalysis Crypto Adoption Index के अनुसार, पिछले वर्ष Crypto Adoption के मामले में पाकिस्तान दुनिया में तीसरे स्थान पर रहा था।

देश में पहले से बड़ी संख्या में लोग USDT (Tether Stablecoin) का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि अब तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि USD1 Stablecoin का पाकिस्तान में वास्तविक उपयोग शुरू हुआ हो।

रिकॉर्ड Remittance के बीच उठे सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि जब पाकिस्तान में बैंकिंग चैनलों के जरिए Remittance लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है, तब नए Stablecoin की जरूरत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

State Bank of Pakistan के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में देश को लगभग 38.3 बिलियन डॉलर की Remittance प्राप्त हुई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि व्यापारिक साझेदार USD1 स्वीकार नहीं करते हैं, तो अंततः उसे अमेरिकी डॉलर में बदलना ही पड़ेगा, जिससे अतिरिक्त प्रक्रिया और लागत बढ़ सकती है।

Crypto Regulation पर तेजी से काम

Pakistan सरकार ने Virtual Assets Act लागू कर Pakistan Virtual Assets Regulatory Authority (PVARA) की स्थापना की है।

यह संस्था Crypto कंपनियों को लाइसेंस देने, निगरानी करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने का काम करेगी। फिलहाल लाइसेंसिंग प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और अधिकांश कंपनियां अभी संचालन की अंतिम अनुमति का इंतजार कर रही हैं।

क्या असली मकसद था White House तक पहुंच?

कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते का आर्थिक लाभ अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसका कूटनीतिक प्रभाव जरूर दिखाई दिया।

समझौते के बाद:

पाकिस्तान और Trump Administration के बीच संपर्क बढ़ा।
सेना प्रमुख Asim Munir ने व्हाइट हाउस में मुलाकात की।
ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
अमेरिकी नेताओं ने पाकिस्तान के प्रयासों की सार्वजनिक सराहना भी की।

विश्लेषकों के अनुसार, यही इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि World Liberty Financial MoU का सबसे बड़ा उद्देश्य तत्काल आर्थिक बदलाव नहीं, बल्कि Strategic Access हासिल करना था।

उनके मुताबिक, इस समझौते ने पाकिस्तान को अमेरिकी प्रशासन के साथ संवाद बढ़ाने का अवसर दिया, जबकि वास्तविक Crypto Adoption और USD1 Stablecoin का उपयोग अभी शुरुआती चरण में भी नहीं पहुंचा है।

फिलहाल यह देखना बाकी है कि भविष्य में यह साझेदारी Digital Payments, Cross-Border Transactions और Pakistan Crypto Ecosystem को कितना वास्तविक लाभ पहुंचा पाती है।