Breaking Defense News: New deal will increase India's strategic reach
भारत और रूस के बीच एक नया defense agreement लागू हो गया है, जिसे दोनों देशों के strategic partnership में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस India-Russia military pact के तहत अब दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर सीमित संख्या में troops deployment, warships और military aircraft तैनात कर सकेंगे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते में एक समय में अधिकतम 3000 सैनिक, 5 युद्धपोत (warships) और 10 सैन्य विमान (military aircraft) तैनात करने की अनुमति दी गई है। यह समझौता 12 जनवरी से लागू हो चुका है और शुरुआती तौर पर इसकी अवधि 5 years तय की गई है, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
Base Access और Strategic Reach
इस military logistics agreement का सबसे अहम पहलू यह है कि दोनों देश एक-दूसरे के airbases और naval ports का उपयोग कर सकेंगे। इसका मतलब है कि भारत को रूस के विभिन्न सैन्य ठिकानों तक पहुंच मिलेगी, जिसमें Arctic region bases भी शामिल हैं।
दूसरी तरफ, रूस को भी भारत के defense bases और पोर्ट्स के इस्तेमाल की अनुमति होगी, जिससे उसकी naval presence और strategic mobility मजबूत हो सकती है।
Agreement में क्या-क्या शामिल है?
इस defense cooperation deal में केवल तैनाती ही नहीं, बल्कि कई अन्य अहम पहलू भी शामिल किए गए हैं:
Joint military exercises और training programs
Humanitarian missions और disaster response operations
सैन्य उपकरणों और कर्मियों के लिए logistics support system
युद्धपोतों के लिए port access, maintenance, fuel, food supply जैसी सुविधाएं
सैन्य विमानों के लिए air traffic control, navigation support और flight coordination
क्यों है यह समझौता अहम?
यह समझौता खासतौर पर भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के पास बड़ी संख्या में Russian-origin defense equipment मौजूद हैं। इस pact के जरिए इन उपकरणों के maintenance और operational efficiency को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, यह डील भारत की overseas military deployment capability को समझने और बढ़ाने में भी सहायक साबित हो सकती है।
India-Russia defense deal केवल एक सामान्य सैन्य समझौता नहीं, बल्कि यह global geopolitics में दोनों देशों की बढ़ती साझेदारी का संकेत है। इस agreement से जहां दोनों देशों की military coordination मजबूत होगी, वहीं भारत की strategic reach भी वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी।