न्यायपालिका को बेचने की कोशिश, 70 वर्षीय वकील को SC से नहीं मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने 70 वर्षीय वकील की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई से इनकार कर दिया। वकील पर आरोप है कि उसने तलाक के मामले में अनुकूल न्यायिक आदेश दिलाने के लिए 30 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा:

“उनहत्तर वर्ष की आयु में वह एक न्यायाधीश को खुलेआम बेच रहा था। हमें ऐसे लोगों के लिए कोई सहानुभूति नहीं है। यह कोई साधारण जालसाजी का मामला नहीं है।”

वकील की दलील और SC की प्रतिक्रिया

वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता 70 साल का है और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है।
पीठ ने कड़ा टिप्पणी करते हुए कहा कि यह न्यायपालिका को बेचने का मामला है, सहानुभूति की गुंजाइश नहीं।
जब याचिका पर विचार करने को लेकर वकील ने अनिच्छा दिखाई, तो उसने याचिका वापस ले ली।

मामला और आरोप

शिकायत के अनुसार, याचिकाकर्ता ने पंजाब की अदालत में लंबित तलाक मामले में अनुकूल निर्णय दिलाने के लिए 30 लाख रुपये रिश्वत मांगे थे।
आरोप है कि उसने न्यायाधीश पर व्यक्तिगत प्रभाव दिखाने का दावा किया और शिकायतकर्ता से रिश्वत लेने का प्रयास किया।

CBI की कार्रवाई

सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी के इशारे पर सह-आरोपी ने चार लाख रुपये की आंशिक राशि स्वीकार की।
आरोपी को अगस्त 2025 में गिरफ्तार किया गया था और चंडीगढ़ की विशेष CBI अदालत ने सितंबर 2025 में जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

उच्च न्यायालय की स्थिति

वकील ने उच्च न्यायालय में कहा कि याचिकाकर्ता को झूठा फंसाया गया। CBI ने दलील दी कि आरोप गंभीर हैं, इसलिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को शिकायतकर्ता और गवाहों से जिरह के बाद नए सिरे से जमानत के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी।