A burden of ₹5,900 crore and a proposal to hike electricity tariffs—how will this impact consumers in Uttarakhand?
Uttarakhand Electricity News: उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। राज्य में बिजली के दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अगर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी ऊर्जा निगम का करीब 5900 करोड़ रुपये का प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो इसकी भरपाई के लिए कुछ समय तक बिजली की दरों में 3 रुपये प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।
बिजली महंगी करने के प्रस्ताव पर हुई जनसुनवाई
बुधवार को Uttarakhand Electricity Regulatory Commission में ऊर्जा निगम के प्रस्ताव को लेकर जनसुनवाई आयोजित की गई। इस सुनवाई का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं और अन्य संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव लेना था।
हालांकि, जनता की ओर से सुनवाई में कोई प्रतिनिधि आपत्ति दर्ज कराने नहीं पहुंचा। वहीं, इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की ओर से राजीव अग्रवाल अपने एक सहयोगी के साथ पहुंचे। उन्होंने प्रस्तावित अतिरिक्त आर्थिक भार पर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब 25 साल बाद इस रकम का बोझ आम जनता पर डालना उचित नहीं होगा।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन संपत्तियों के ट्रांसफर और उनके रखरखाव से जुड़ी रकम का दावा किया जा रहा है, उनकी वास्तविक स्थिति की जांच से संबंधित पर्याप्त रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं। एसोसिएशन ने उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेने की मांग की।
जनता के नहीं पहुंचने पर आयोग अध्यक्ष भी हैरान
जनसुनवाई में आम लोगों की गैरमौजूदगी पर विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद ने भी हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि लोगों को आपत्ति दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। इसके लिए सूचना प्रकाशित कराने के साथ आयोग की वेबसाइट पर भी जानकारी उपलब्ध कराई गई थी।
अब जनसुनवाई पूरी होने के बाद आयोग सामने आई आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा करेगा। इसके बाद ऊर्जा निगम के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
आखिर 5900 करोड़ रुपये का मामला क्या है?
इस पूरे विवाद की जड़ उत्तराखंड के गठन के समय हुए Power Assets Transfer से जुड़ी है। वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड को बिजली योजनाओं से संबंधित करीब 550 करोड़ रुपये की संपत्तियां मिली थीं।
बताया गया कि इन संपत्तियों की राशि ऊर्जा निगम को बिजली की दरों के माध्यम से प्राप्त होनी थी, लेकिन यह रकम अब तक पूरी तरह नहीं मिल सकी। दूसरी ओर, इन संपत्तियों के रखरखाव पर वर्षों से खर्च होता रहा।
ऊर्जा निगम के मुताबिक, मूल 550 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़ी रकम और वर्षों के Maintenance Cost को जोड़ने पर यह राशि बढ़कर करीब 5900 करोड़ रुपये हो गई है।
वित्त विभाग से नहीं बनी बात, उपभोक्ताओं से वसूली का प्रस्ताव
मामले में वित्त विभाग इस रकम को ऊर्जा निगम से मिलने वाली राशि के साथ Book Adjustment के जरिए समायोजित करने को तैयार नहीं है। इसके बाद ऊर्जा निगम ने इस आर्थिक भार की भरपाई बिजली उपभोक्ताओं से करने का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग के सामने रखा है।
अगर आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो आने वाले समय में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू, कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ
फिलहाल बिजली की दरों में 3 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी तय नहीं हुई है। यह एक आकलन है कि 5900 करोड़ रुपये की प्रस्तावित रिकवरी के लिए बिजली की दरों में कितना अतिरिक्त भार पड़ सकता है।
जनसुनवाई के बाद आयोग आपत्तियों और सुझावों की जांच करेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि ऊर्जा निगम की मांग को किस रूप में स्वीकार किया जाए या उसमें कोई बदलाव किया जाए।
उत्तराखंड में अभी कितनी है बिजली की दर?
वर्तमान दरों की बात करें तो बीपीएल उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर करीब 1.85 रुपये प्रति यूनिट बताई गई है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग स्लैब के अनुसार दर 3.65 रुपये से 7.80 रुपये प्रति यूनिट तक है।
वहीं, कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए यह दर करीब 5.75 से 6 रुपये प्रति यूनिट और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए करीब 5.75 से 8.91 रुपये प्रति यूनिट तक बताई गई है।
ऐसे में यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो बिजली के नए रेट का सीधा असर उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर पड़ सकता है। अब सभी की नजर Uttarakhand Electricity Regulatory Commission के अंतिम फैसले पर है।