भूकंप की विनाशलीला: म्यांमार में 1000+ की मौत, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

म्यांमार में आए भीषण भूकंप ने देश में त्राहिमाम मचा दिया है। 7.7 तीव्रता के इस विनाशकारी भूकंप में 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2376 लोग घायल और लापता हैं। भूकंप का केंद्र मांडले के पास था, और इसके बाद कई झटके महसूस किए गए, जिनमें एक झटके की तीव्रता 6.4 मापी गई।

बड़े पैमाने पर तबाही, ढही इमारतें और टूटी सड़कें
भूकंप के कारण कई इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं, सड़कें टूट गईं और एक बड़ा बांध भी क्षतिग्रस्त हो गया। राजधानी नेपीडॉ में कर्मचारियों ने क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत शुरू की, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में बिजली, फोन और इंटरनेट सेवाएं बाधित रहीं।

थाईलैंड में भी महसूस किए गए झटके, 6 की मौत
भूकंप के झटके पड़ोसी देश थाईलैंड में भी महसूस किए गए, जिससे बैंकॉक क्षेत्र भी हिल गया। थाईलैंड में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 26 घायल और 47 लोग लापता हैं। राजधानी बैंकॉक के चतुचक बाजार के पास एक निर्माण स्थल पर कई लोग मलबे में दब गए।

बचाव कार्य में जुटे आपातकालीन दल, राहत की उम्मीदें कम
शनिवार को मलबा हटाने के लिए और अधिक भारी मशीनरी लगाई गई, लेकिन लापता लोगों के परिवारों और दोस्तों के बीच उम्मीदें कम होती जा रही थीं। एक महिला ने कहा, “मैं प्रार्थना कर रही थी कि वे जीवित हों, लेकिन यहां पहुंचने पर खंडहर देखकर मैं टूट गई।”

भारत ने शुरू किया ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’, 80 सदस्यीय NDRF दल भेजा
म्यांमार में भूकंप के बाद भारत ने तुरंत ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत 80 सदस्यीय राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम को भेजा है। यंगून में भारत के राजदूत अभय ठाकुर ने राहत सामग्री की पहली खेप यंगून के मुख्यमंत्री यू सोई थीन को सौंपी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि NDRF टीम ने पी ताव के लिए रवाना हो गई है और म्यांमार में बचाव कार्यों में सहायता करेगी।

भविष्य की तैयारी की जरूरत
इस त्रासदी ने म्यांमार और थाईलैंड में आपदा प्रबंधन की कमियों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप जैसी आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी, मजबूत बुनियादी ढांचा और आपातकालीन सेवाओं की प्रभावी योजना बनाना बेहद जरूरी है।