Pushkar Singh Dhami on Corruption: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जीरो टॉलरेंस नीति रंग लाने लगी है। मुख्यमंत्री ने रविवार को बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में 200 से अधिक भ्रष्ट लोगों को जेल भेजा गया है, जिनमें सरकारी अधिकारी, नकल माफिया, और भर्ती घोटाले के आरोपी शामिल हैं।
धामी ने कहा कि अब तक जो धारणा थी कि सिर्फ ‘छोटी मछलियों’ को ही पकड़ा जाता है, उसे उनकी सरकार ने गलत साबित कर दिया है। अब चाहे कोई IAS, PCS, या फिर IFS अधिकारी ही क्यों न हो—अगर वो भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है, तो कानूनी शिकंजा कसना तय है।
भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड मिशन पर फोकस
मुख्यमंत्री धामी ने एक धार्मिक-सामाजिक संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा,
“भ्रष्टाचार एक अभिशाप है, जिसने लोगों को उनके अधिकारों से वंचित किया। लेकिन अब हम इससे निर्णायक युद्ध लड़ रहे हैं।”
Transparency & Technology Driven Governance
धामी सरकार ने Digital Governance को बढ़ावा देते हुए कई टेक्नोलॉजी-आधारित कदम उठाए हैं:
Online Transfer System
Nakal Virodhi Kanoon (Anti-Cheating Law)
Corruption Helpline 1064
Exam Monitoring via AI and CCTV Surveillance
3.5 साल में 24,000 सरकारी नियुक्तियाँ बिना घोटाले के
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि:
“हमने पिछले साढ़े तीन सालों में 24 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी, और इस बार कोई नकल या धोखाधड़ी सामने नहीं आई।”
100+ नकल माफिया जेल में
नकल रोकने के लिए बनाए गए कानून के तहत अब तक 100 से ज़्यादा नक़ल माफियाओं को सलाखों के पीछे भेजा गया है।
जनता को बताया सबसे बड़ी ताकत
धामी ने जनता को भ्रष्टाचार के खिलाफ इस मुहिम की रीढ़ बताया।
“यह मेरा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सवा करोड़ जनता का सम्मान है, जो ईमानदारी और पारदर्शिता की राह पर मेरे साथ है।”