Amidst questions surrounding the ED raid on the OSD's residence, Harish Rawat admits, "I made a mistake."
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी है। रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उनसे एक चूक हुई थी और इसके लिए वह पहले भी माफी मांग चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह इस चूक के लिए एक बार फिर क्षमा मांगते हैं।
हरीश रावत ने सरकार से अपने कार्यकाल के दौरान हुई सरकारी नियुक्तियों की जांच कराने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक आयोग बनाया जा सकता है और यदि जांच में कहीं उनके द्वारा पद का दुरुपयोग किए जाने की बात सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
‘मुझसे हुई चूक के लिए पहले भी मांग चुका हूं माफी’
सोशल मीडिया पर लिखी अपनी पोस्ट में हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके करीब तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी मिली, जबकि करीब 18 हजार पदों पर भर्ती के लिए अधियाचन जारी किए गए।
रावत ने कहा कि उनके कार्यकाल में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के अध्यक्ष पद पर की गई नियुक्ति को लेकर उनसे चूक हुई थी। उनके मुताबिक, जिस व्यक्ति को यह जिम्मेदारी दी गई, वह पद की गरिमा के अनुरूप काम नहीं कर सके।
रावत ने कहा कि इस नियुक्ति से जुड़ी चूक के लिए वह पहले भी क्षमा मांग चुके हैं और अब दोबारा माफी मांग रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ जिस तरह का अभियान चलाया जा रहा है, उसी वजह से उन्हें सार्वजनिक तौर पर अपनी बात रखने के लिए सामने आना पड़ा।
चंदन सिंह जीना का किया बचाव
ED की कार्रवाई के बीच हरीश रावत ने चंदन सिंह जीना का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि जीना वर्ष 1991 से उनके साथ काम कर रहे हैं और लंबे समय से उनके प्रति निष्ठावान रहे हैं।
रावत ने दावा किया कि जीना के पास मिली संपत्ति को उनका पैसा बताकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी राजनीतिक पद या राजनीतिक काम के बदले पैसे नहीं लिए और उनका सार्वजनिक जीवन एक खुली किताब की तरह है।
हालांकि, चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में ED की जांच अभी जारी है। एजेंसी की जांच से सामने आने वाले तथ्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
क्या है UKSSSC VPDO परीक्षा का मामला?
ED की कार्रवाई उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में हुई है।
इसी मामले की जांच के तहत ED ने चंदन सिंह जीना और आयोग से जुड़े कुछ पूर्व अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी के अनुसार, जीना के घर से नकदी, सोने के सिक्के, आभूषण, दस्तावेज और मोबाइल फोन समेत कई सामान बरामद किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, ED ने करीब 1.28 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इसमें करीब 32 लाख रुपये नकद, 200.5 ग्राम वजन के 13 सोने के सिक्के और सात सोने की चेन शामिल हैं।
इसके अलावा रोलेक्स, राडो, पियाजे, मोवाडो, टिसोट और कैसियो एडिफिस जैसे ब्रांड की 12 लग्जरी घड़ियां भी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी ने जीना और उनके परिवार के बैंक खातों में जमा करीब 52.16 लाख रुपये की राशि भी फ्रीज की है।
ED जांच में क्या आरोप सामने आए?
ED के मुताबिक, जांच में ऐसे खर्च और नकद लेनदेन सामने आए हैं जिनका संबंध जीना की आय के ज्ञात स्रोतों से मेल नहीं खाता। एजेंसी ने उनके मोबाइल फोन को भी जब्त किया है, जिसका फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है।
इन जांच निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में ED की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
रावत ने अपने कार्यकाल की जांच की दी चुनौती
ED की कार्रवाई के बीच हरीश रावत का सरकार से अपने कार्यकाल की नियुक्तियों की जांच कराने का आग्रह राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रावत ने कहा है कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुई सरकारी नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच हरीश रावत की माफी, चंदन सिंह जीना का बचाव और अपने कार्यकाल की जांच की मांग ने उत्तराखंड की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।