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YouTube Channel Delete: हाईकोर्ट ने साफ किया- निजी प्लेटफॉर्म के खिलाफ Article 226 में रिट नहीं

उत्तराखंड
By Vichar Dhaara Team On Aug 6, 2026 0
YouTube Channel Deletion: High Court clarifies—no writ petition under Article 226 against a private platform.

Uttarakhand High Court: YouTube Channel को बिना नोटिस हटाए जाने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि YouTube एक Private Entity है और भारतीय संविधान के Article 12 के तहत ‘State’ की श्रेणी में नहीं आता। ऐसे में उसके खिलाफ संविधान के Article 226 के तहत Writ Petition दाखिल कर राहत मांगना सुनवाई योग्य नहीं है।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यूट्यूब और याचिकाकर्ता के बीच संबंध Contractual Agreement पर आधारित है। इसलिए चैनल हटाने से जुड़ा विवाद Public Law का नहीं, बल्कि एक Contractual Dispute का मामला है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला पौड़ी गढ़वाल निवासी स्वाति उर्फ स्मृति नेगी से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने YouTube Channel को दोबारा बहाल करने की मांग की थी।

याचिका में मांग की गई थी कि YouTube को हटाए गए चैनल और उससे संबंधित Content को Restore करने के साथ-साथ कथित Copyright Strikes को भी हटाने का निर्देश दिया जाए।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि तीन कथित Copyright Strikes का हवाला देते हुए उनका YouTube Account बिना किसी पूर्व नोटिस और Opportunity of Hearing दिए डिलीट कर दिया गया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मामले पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि YouTube भारतीय संविधान के Article 12 के तहत ‘State’ की परिभाषा में शामिल नहीं है।

इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि किसी निजी संस्था या Private Digital Platform के खिलाफ संविधान के Article 226 के तहत Writ Petition के जरिए राहत नहीं मांगी जा सकती।

अदालत के मुताबिक याचिकाकर्ता और YouTube के बीच संबंध किसी सरकारी अधिकार या सार्वजनिक कानून से नहीं, बल्कि एक Agreement/Contract से संचालित होता है।

Contractual Dispute है मामला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी Private Contract की शर्तों के उल्लंघन को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो उसके समाधान के लिए संविधान के तहत Public Law Remedy का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

यानी YouTube Channel को हटाने और कथित Copyright Strikes से जुड़ा विवाद अदालत की नजर में मुख्य रूप से Contractual Dispute है। इसलिए इस मामले में Article 226 के तहत दायर रिट याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता के लिए दूसरे Legal Options खुले

हाईकोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता को पूरी तरह कानूनी उपायों से वंचित नहीं किया है। कोर्ट ने उन्हें यह छूट दी है कि वह Contractual Dispute Resolution के लिए कानून में उपलब्ध अन्य Legal Remedies का इस्तेमाल कर सकती हैं।

इसका अर्थ है कि YouTube Channel की बहाली, Content और Copyright Strikes से जुड़े विवाद के समाधान के लिए याचिकाकर्ता उचित कानूनी मंच या उपलब्ध अन्य वैधानिक विकल्पों का सहारा ले सकती हैं।

फैसले का क्या है महत्व?

उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह फैसला इस बात को स्पष्ट करता है कि हर Online Platform Dispute को सीधे संवैधानिक रिट के जरिए अदालत के सामने नहीं लाया जा सकता। यदि किसी Private Platform और User के बीच संबंध Terms and Conditions या किसी Agreement पर आधारित है, तो उससे जुड़े विवाद की प्रकृति को भी ध्यान में रखना होगा।

इस मामले में हाईकोर्ट ने YouTube को Article 12 के तहत ‘State’ नहीं माना और विवाद को Contractual Nature का बताते हुए Article 226 के तहत याचिका खारिज कर दी। साथ ही याचिकाकर्ता को उपलब्ध अन्य कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता दी है।

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