उत्तराखंड में SIR ने बढ़ाई टेंशन, शादी के बाद सरनेम बदला तो मिला नोटिस, एक पिता के 6 दावेदार

Uttarakhand SIR: उत्तराखंड में Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया के दौरान मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन में कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनसे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। पिथौरागढ़ में SIR Verification के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले विवाहित महिलाओं से जुड़े बताए जा रहे हैं। इसके अलावा रिकॉर्ड की जांच में एक ऐसा मामला भी सामने आया है, जहां एक ही व्यक्ति को छह अलग-अलग मतदाताओं ने अपना पिता बताया है।

89 हजार से ज्यादा मतदाताओं को जारी हुए नोटिस

पिथौरागढ़ जिले में Election Commission SIR Campaign के तहत डेटा मिलान के दौरान 89 हजार से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें करीब 70 हजार मतदाताओं के रिकॉर्ड में नाम और जन्मतिथि जैसी जानकारियों में अंतर सामने आया है। वहीं करीब 19 हजार मतदाताओं को mapping issues के चलते नोटिस जारी किए गए हैं।

निर्वाचन विभाग अब इन मामलों में दस्तावेजों के आधार पर मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन कर रहा है।

शादी के बाद Surname बदला तो रिकॉर्ड में आया mismatch

पिथौरागढ़ में SIR के दौरान विवाहित महिलाओं से जुड़े मामलों की संख्या ज्यादा सामने आई है। इसकी एक बड़ी वजह शादी के बाद surname change होना बताई जा रही है।

पुराने मतदाता रिकॉर्ड में कई महिलाओं के नाम उनके मायके यानी पिता के surname के साथ दर्ज थे। शादी के बाद उन्होंने पति का surname अपना लिया। अब जब पुराने रिकॉर्ड का digital data मौजूदा मतदाता जानकारी से मिलान किया गया, तो surname में अंतर दिखाई दिया।

इस तरह के name mismatch को डेटा सत्यापन के दौरान संदेह वाली श्रेणी में रखा गया और संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजे गए।

एक पिता के 6 दावेदार, रिकॉर्ड देखकर अधिकारी भी हैरान

SIR Data Scrutiny के दौरान पिथौरागढ़ में एक और असामान्य मामला सामने आया है। रिकॉर्ड में एक ही व्यक्ति को छह अलग-अलग मतदाताओं ने अपना पिता बताया है।

मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने संबंधित व्यक्ति के साथ-साथ उन छह मतदाताओं को भी verification notice जारी किया है। अब विभाग दस्तावेजों के जरिए यह पता लगाने में जुटा है कि रिकॉर्ड में यह विसंगति कैसे दर्ज हुई।

Notice मिला है तो समय पर दें जवाब

निर्वाचन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिन मतदाताओं को SIR का नोटिस मिला है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर BLO या तहसील कार्यालय में उपस्थित होकर जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। नोटिस में मांगे गए दस्तावेजों और सत्यापन की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी दी गई है।

सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी मोहम्मद शरीफ ने बताया कि नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं को तय समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज जमा कराकर अपने रिकॉर्ड का सत्यापन कराना होगा।

SIR Verification में Documents क्यों हैं जरूरी?

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का Data Verification करना और रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को दूर करना है। ऐसे में नाम, जन्मतिथि, पारिवारिक संबंध या पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी में अंतर मिलने पर मतदाताओं से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।

खासकर उन लोगों के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है, जिनके पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड में Name, Surname, Date of Birth या Family Details में बदलाव हुआ है।

उत्तराखंड में SIR को लेकर बढ़ी हलचल

पिथौरागढ़ में सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा मतदाता डेटा के बीच अंतर कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। विवाहित महिलाओं के surname change से लेकर एक व्यक्ति के छह अलग-अलग लोगों के पिता के रूप में दर्ज होने तक, SIR Electoral Roll Verification में कई तरह की विसंगतियां सामने आ रही हैं।

ऐसे में नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे निर्धारित प्रक्रिया और समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखें और मांगे गए दस्तावेज जमा करें, ताकि उनके मतदाता रिकॉर्ड का सही तरीके से सत्यापन हो सके।