West Bengal Crime: बारुईपुर रेप-मर्डर केस में आरोपी प्रभास मंडल पुलिस मुठभेड़ में ढेर

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। घटना की निष्पक्ष जांच के लिए एनकाउंटर की जांच अब CID को सौंपे जाने की तैयारी है। पुलिस के अनुसार, प्रभास मंडल वही व्यक्ति था जिसे CCTV फुटेज में आखिरी बार पीड़ित बच्ची के साथ देखा गया था।

4 जुलाई को मिली थी बच्ची की लाश

4 जुलाई को सूर्यपुर हाट क्षेत्र के एक तालाब से बोरे में बंद 11 वर्षीय बच्ची का शव बरामद हुआ था। शुरुआती जांच में सामने आया कि बच्ची अपनी सहेली के लिए उपहार खरीदने निकली थी, लेकिन रास्ते में उसके साथ दरिंदगी की गई और बाद में उसे बोरे में भरकर तालाब में फेंक दिया गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची के सिर पर गंभीर चोट के निशान मिले। जांच में यह भी सामने आया कि तालाब में फेंके जाने के समय वह जीवित थी, क्योंकि उसके फेफड़ों और पेट में पानी पाया गया। इसके अलावा शरीर पर कई चोटें, खरोंच और निजी अंगों पर गंभीर चोट के निशान भी मिले।

सीन रीक्रिएशन के दौरान हुआ एनकाउंटर

पुलिस के मुताबिक, 8 जुलाई की देर रात करीब 1:45 बजे प्रभास मंडल को घटनास्थल पर सीन रीक्रिएशन के लिए ले जाया गया था। इसी दौरान उसने कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी की पिस्तौल छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग कर दी।

इसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की, जिसमें प्रभास मंडल गोली लगने से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, उसके शरीर में दो गोलियां लगीं और आर-पार निकल गईं।

CCTV फुटेज से आरोपी तक पहुंची पुलिस

जांच के दौरान CCTV फुटेज में प्रभास मंडल को बच्ची के साथ आखिरी बार देखा गया था। पुलिस जब उसके घर पहुंची तो परिवार ने पहले उसके घर पर न होने की बात कही, लेकिन तलाशी के दौरान वह घर के अंदर छिपा मिला। पूछताछ में उसने शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन बाद में कथित तौर पर अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार की।

अब CID करेगी मुठभेड़ की जांच

चूंकि इस एनकाउंटर में बारुईपुर पुलिस के अधिकारी शामिल थे, इसलिए मामले की स्वतंत्र जांच CID को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके साथ ही न्यायिक जांच भी जारी रहेगी, ताकि मुठभेड़ से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो सके।