Ganga River Tragedy: Delhi couple swept away while bathing in Rishikesh; SDRF search operation underway.
उत्तराखंड के ऋषिकेश में रविवार शाम गंगा नदी में नहाने के दौरान दिल्ली के एक दंपति समेत तीन लोग तेज बहाव की चपेट में आकर लापता हो गए। घटना के बाद SDRF, जल पुलिस और गोताखोरों की टीम ने देर शाम तक Search Operation चलाया, लेकिन किसी का भी पता नहीं चल सका। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस के अनुसार नई दिल्ली के नजफगढ़ निवासी मनीष अपनी पत्नी जानकी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ ऋषिकेश घूमने आए थे। रविवार शाम वे नावघाट क्षेत्र के पास गंगा में स्नान करने उतरे। शुरुआती समय में जल प्रवाह सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन कुछ ही देर बाद दोनों पति-पत्नी तेज धारा में बह गए। परिवार के लोगों ने शोर मचाया तो आसपास मौजूद लोग और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।
घटना की सूचना मिलते ही SDRF और जल पुलिस की टीम ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया। गोताखोरों की मदद से काफी देर तक तलाश की गई, लेकिन अंधेरा होने के कारण अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार सोमवार को दोबारा व्यापक Search Operation चलाया जाएगा।
एक और पर्यटक गंगा में लापता
इसी दिन एक अन्य हादसे में दिल्ली से आए छह पर्यटकों के समूह का सदस्य राहुल चौहान शिवपुरी स्थित प्रतिबंधित युसूफ बीच पर नहाने के दौरान गंगा के तेज बहाव में बह गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार राहुल अचानक गहरे पानी में चला गया और कुछ ही सेकंड में आंखों से ओझल हो गया। सूचना मिलने पर जल पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन देर शाम तक उसका भी कोई सुराग नहीं लग पाया।
45 दिनों में 17 लोगों की मौत
ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में गंगा नदी में डूबने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले 45 दिनों के भीतर 17 लोगों की जान जा चुकी है। अधिकांश हादसे उन स्थानों पर हुए हैं जहां स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया है या चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
पुलिस और प्रशासन लगातार लोगों से सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करने की अपील कर रहे हैं। इसके बावजूद कई पर्यटक और स्थानीय लोग चेतावनियों को नजरअंदाज कर जोखिम उठाते हैं, जिसके चलते ऐसे हादसे सामने आ रहे हैं।
प्रशासन ने की सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे गंगा में स्नान करते समय पूरी सावधानी बरतें, निर्धारित घाटों का ही उपयोग करें और तेज बहाव वाले या प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने से बचें। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के करीब आते ही नदी का जलस्तर और बहाव तेजी से बदल सकता है, इसलिए सुरक्षा निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।