1 kg of garbage can bring a big change in Kedarnath Yatra, unique formula goes viral
उत्तराखंड में चल रही केदारनाथ यात्रा इस वर्ष नए रिकॉर्ड बना रही है। यात्रा शुरू होने के बाद महज 40 दिनों के भीतर करीब 15 लाख श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। जहां एक ओर इस भारी संख्या में यात्रियों के आने से स्थानीय कारोबार और पर्यटन को बड़ा फायदा मिला है, वहीं दूसरी ओर हिमालय के नाजुक पर्यावरण पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
इसी चुनौती के बीच पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था Healing Himalayas Foundation के संस्थापक प्रदीप सांगवान का एक अनोखा अभियान चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा यह अभियान लोगों को हिमालय को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित कर रहा है।
क्या है ‘Carry Me Back’ अभियान?
प्रदीप सांगवान ने ‘Carry Me Back’ नाम से एक सरल लेकिन प्रभावशाली अभियान शुरू किया है। इसका मूल विचार यह है कि हर तीर्थयात्री अपने साथ कम से कम एक किलो कचरा नीचे वापस लेकर आए। इस अभियान के तहत डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है ताकि वास्तविक प्रभाव को मापा जा सके।
सांगवान का कहना है कि यदि सिर्फ एक लाख यात्री भी अपने साथ एक-एक किलो प्लास्टिक या अन्य कचरा वापस लाते हैं, तो पहाड़ों से लगभग 100 टन कचरा हटाया जा सकता है। यही इस अभियान का प्रमुख लक्ष्य है।
छोटे प्रयास से बड़ा बदलाव
अभियान के तहत यात्रियों से अपील की जा रही है कि वे खाली प्लास्टिक बोतलें, डिस्पोजेबल कप, पैकेजिंग सामग्री और अन्य कचरे को रास्ते में फेंकने के बजाय वापस लेकर आएं। प्रति व्यक्ति 250 ग्राम से 5 किलो तक कचरा वापस लाना भी इस मिशन में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
प्रदीप सांगवान का मानना है कि जब लाखों लोग एक छोटी जिम्मेदारी निभाते हैं, तो उसका असर बहुत बड़ा होता है। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर यात्री और नागरिक की भी भागीदारी जरूरी है।
मलाना से शुरू हुई थी सफाई की मुहिम
इस अभियान की प्रेरणा कई साल पहले हिमाचल प्रदेश के मलाना क्षेत्र में फैले भारी कचरे को देखकर मिली थी। पर्यटन स्थलों पर बढ़ते कचरे ने प्रदीप सांगवान को झकझोर दिया था। इसके बाद उन्होंने अपने दोस्तों और परिवार के साथ ट्रैकिंग रूट्स से कचरा हटाने का काम शुरू किया।
साल 2016 में इस पहल ने Healing Himalayas Foundation का रूप लिया। संस्था का उद्देश्य केवल सफाई अभियान चलाना नहीं बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
आध्यात्मिक यात्रा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
‘Carry Me Back’ अभियान ने केदारनाथ यात्रा को केवल धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक Environmental Conservation Movement का रूप दे दिया है। यह संदेश देता है कि प्रकृति और आस्था दोनों का सम्मान साथ-साथ होना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ती पर्यटक संख्या के बीच ऐसे प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि श्रद्धालु अपनी यात्रा के दौरान पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए इन प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
सोशल मीडिया पर मिल रहा भरपूर समर्थन
इस अभियान को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिल रहा है। कई लोग इसे देश के अन्य धार्मिक स्थलों, जंगलों और नदी क्षेत्रों में भी लागू करने की मांग कर रहे हैं। पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यह मॉडल भारत में Sustainable Tourism और Responsible Pilgrimage को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
एक किलो कचरा किसी एक व्यक्ति के लिए मामूली जिम्मेदारी हो सकती है, लेकिन जब यही कदम लाखों लोग उठाते हैं, तो यह हिमालय को बड़े पर्यावरणीय संकट से बचाने की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।