Big debate in Supreme Court on UAPA Bail Rules, Government asked- would Kasab also have got bail?
Supreme Court of India में इन दिनों आतंकवाद विरोधी कानून Unlawful Activities (Prevention) Act यानी UAPA के तहत जमानत नियमों को लेकर बड़ी कानूनी बहस चल रही है। केंद्र सरकार ने कोर्ट में बेहद सख्त सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर केवल ट्रायल में देरी ही जमानत का आधार बन जाए, तो क्या Ajmal Kasab और Hafiz Saeed जैसे आतंकियों को भी बेल मिल जाएगी?
यह मामला अब देश की न्याय व्यवस्था, National Security और Fundamental Rights के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
UAPA मामलों में जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट की दो अलग-अलग बेंचों ने हाल के महीनों में अलग-अलग राय दी है।
एक बेंच ने कहा कि:
अगर ट्रायल में बहुत ज्यादा देरी हो रही है
आरोपी लंबे समय से जेल में है
और मुकदमा पूरा होने की संभावना दूर है
तो Article 21 के तहत उसे जमानत मिल सकती है।
लेकिन दूसरी बेंच ने इस सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ लंबी कैद को Bail Formula नहीं बनाया जा सकता।
केंद्र सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
केंद्र सरकार और Delhi Police की ओर से पेश हुए Additional Solicitor General SV Raju ने कहा कि हर आरोपी को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कोर्ट में कहा:
“अगर अजमल कसाब के मामले में गवाह ज्यादा होने से ट्रायल लंबा चला, तो क्या उसे जमानत दे दी जाती? अगर हाफिज सईद को भारत लाया जाए और सबूत जुटाने में पांच साल लग जाएं, तो क्या उसे भी बेल मिलनी चाहिए?”
सरकार का कहना है कि:
Crime Severity
Accused Role
National Security Risk
जमानत तय करने में बेहद महत्वपूर्ण फैक्टर हैं।
उमर खालिद और शरजील इमाम का भी जिक्र
ASG ने Umar Khalid और Sharjeel Imam के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट पहले भी गंभीर भूमिका वाले आरोपियों को राहत देने से इनकार कर चुका है।
सरकार का तर्क है कि:
हर UAPA आरोपी समान नहीं होता
कुछ मामलों में Terror Conspiracy और Organized Violence ज्यादा गंभीर होते हैं
इसलिए “एक नियम सब पर” लागू नहीं किया जा सकता
Supreme Court की दो बेंचों में क्यों टकराव?
पहली बेंच का रुख
BV Nagarathna और Ujjal Bhuyan की बेंच ने मई 2026 में कहा था कि:
लंबे समय तक जेल में रखना
और ट्रायल में देरी
जमानत का मजबूत आधार हो सकता है।
उन्होंने “Bail is the Rule, Jail is the Exception” सिद्धांत का हवाला दिया।
दूसरी बेंच का रुख
वहीं Aravind Kumar और PB Varale की बेंच ने कहा:
लंबी कैद को Mathematical Formula नहीं बनाया जा सकता
आरोपी की भूमिका और अपराध की गंभीरता जरूरी है
अब बड़ी बेंच करेगी अंतिम फैसला
कानूनी विरोधाभास को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला अब Larger Bench को भेज दिया है।
अब Supreme Court of India की बड़ी पीठ तय करेगी कि:
क्या Trial Delay अपने आप में Bail Ground है?
या National Security मामलों में अलग मानदंड लागू होंगे?
यह फैसला आने वाले समय में UAPA के सैकड़ों मामलों को प्रभावित कर सकता है।
UAPA क्यों है इतना सख्त कानून?
Unlawful Activities (Prevention) Act भारत का प्रमुख Anti-Terror Law है।
इसकी धारा 43D(5) के अनुसार:
अगर जांच एजेंसी के दस्तावेज Prima Facie सही लगते हैं
तो आरोपी को जमानत देना बेहद मुश्किल हो जाता है
इसी वजह से UAPA मामलों में कई आरोपी सालों तक Trial शुरू होने से पहले ही जेल में रहते हैं।
National Security बनाम Personal Liberty
यह पूरा मामला अब दो बड़े सवालों के बीच संतुलन का मुद्दा बन गया है:
एक तरफ:
राष्ट्रीय सुरक्षा
आतंकवाद रोकना
गंभीर अपराधों पर सख्ती
दूसरी तरफ:
Article 21
व्यक्तिगत स्वतंत्रता
बिना सजा लंबे समय तक जेल
विशेषज्ञ मानते हैं कि Supreme Court का आने वाला फैसला भारत की Criminal Justice System में बड़ा बदलाव ला सकता है।