West Bengal Madarsa Rule: अब हर सुबह मदरसों में गाया जाएगा वंदे मातरम

West Bengal में मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने अब सभी मदरसों में भी ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है।

मदरसा शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब राज्य के सभी मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त मदरसों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का गायन किया जाएगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

स्कूलों के बाद अब मदरसों तक पहुंचा आदेश

दरअसल, इससे एक सप्ताह पहले ही बंगाल सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरे गाना अनिवार्य किया था। अब इसी फैसले को मदरसों तक भी विस्तार दे दिया गया है।

सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

किन संस्थानों पर लागू होगा आदेश?

यह नया नियम इन सभी संस्थानों पर लागू होगा:

Government Recognized Madarsas
Aided Madarsas
Unaided Madarsas
Minority Affairs & Madarsa Education Department के अंतर्गत आने वाले संस्थान
सभी छह अंतरे गाना क्यों हुआ जरूरी?

फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर सम्मान देने का फैसला लिया था। इसके बाद सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय गीत के पूर्ण संस्करण के गायन पर जोर बढ़ा।

इसी फैसले के बाद अब कई राज्यों में इसे लेकर नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

दक्षिण भारत में भी छिड़ी थी बहस

‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण को लेकर विवाद सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है।

Tamil Nadu और Kerala में हाल ही में हुए शपथ ग्रहण समारोहों में भी राष्ट्रीय गीत के सभी अंतरे गाए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद देखने को मिला था।

तमिलनाडु में विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक संदेश बताया, जबकि केरल में वामपंथी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए।

बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे राज्य की राजनीतिक दिशा बदलती दिखाई दे रही है।

हाल के दिनों में राज्य सरकार ने:

स्कूलों में Vande Mataram अनिवार्य किया
राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर नए निर्देश जारी किए
शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रवादी कार्यक्रमों पर जोर बढ़ाया

इन फैसलों को लेकर राज्य में सियासी बहस भी तेज हो गई है।

क्या हो सकता है असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में यह पश्चिम बंगाल की राजनीति और सामाजिक विमर्श का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

एक तरफ सरकार इसे National Integration और Cultural Identity से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण का मुद्दा बता रहा है।