Did the US-Iran War break America's power? Advanced jets and drones were destroyed.
Middle East में जारी US-Iran War अब अमेरिका के लिए भारी पड़ता नजर आ रहा है। युद्ध शुरू होने के दो महीने बाद भी हालात काबू में नहीं आए हैं और इस बीच एक नई रिपोर्ट ने अमेरिकी सैन्य अभियान पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका अब तक 42 विमान और ड्रोन गंवा चुका है, जबकि युद्ध का खर्च बढ़कर लगभग 29 अरब डॉलर यानी करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की रणनीति के बावजूद ईरान अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ है। इससे अमेरिका की global image और military dominance पर भी असर पड़ा है।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में बड़ा नुकसान
अमेरिकी संसद की रिसर्च इकाई Congressional Research Service (CRS) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान “Operation Epic Fury” में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हुआ है।
बताया गया है कि कई advanced fighter jets, surveillance aircraft और drones या तो पूरी तरह नष्ट हो गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस वजह से Pentagon का defense budget भी तेजी से बढ़ा है।
कौन-कौन से एयरक्राफ्ट हुए तबाह?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के कई हाई-टेक सैन्य प्लेटफॉर्म इस युद्ध में निशाना बने हैं। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान MQ-9 Reaper drones को हुआ है। दावा है कि ईरान ने 24 Reaper drones मार गिराए हैं।
इसके अलावा:
F-35 stealth fighter jet को नुकसान
4 F-15E Strike Eagle fighter jets प्रभावित
7 aerial refueler aircraft निशाने पर
1 E-3 Sentry AWACS aircraft क्षतिग्रस्त
2 special operations aircraft प्रभावित
1 rescue helicopter तबाह
MQ-4C Triton surveillance drone नष्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि Vietnam War और Iraq War के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका को इतने बड़े स्तर पर aircraft losses का सामना करना पड़ा है।
2.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा खर्च
रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध की बढ़ती लागत ने अमेरिकी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी संसद की House Appropriations Subcommittee में Pentagon के Acting Comptroller Jules W. Hurst III ने बताया कि ईरान में चल रहे सैन्य अभियानों का अनुमानित खर्च 29 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
इस रकम का बड़ा हिस्सा destroyed aircraft, drone replacement, repair work और military logistics पर खर्च हो रहा है।
ईरान अभी भी नहीं झुका
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार हमलों के बावजूद Iran ने अब तक अपनी शर्तों से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। यही वजह है कि यह युद्ध अब केवल सैन्य संघर्ष नहीं बल्कि geopolitical prestige battle भी बन चुका है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि हालात जल्द नहीं बदले, तो इसका असर global oil market, energy supply chain और Middle East stability पर भी पड़ सकता है।