YouTube Channel Deletion: High Court clarifies—no writ petition under Article 226 against a private platform.
उत्तराखंड हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) में सोमवार को एक अहम जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान अदालत ने बड़ा सवाल उठाया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आखिर ऐसे कितने लोग हैं जिन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म (Religious Conversion) अपना लिया, लेकिन इसके बावजूद अब भी सरकारी योजनाओं और Reservation का लाभ ले रहे हैं।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह ऐसे लोगों को मामले में पक्षकार बनाए और तीन सप्ताह के भीतर पूरी जानकारी कोर्ट के सामने पेश करे।
क्या है पूरा मामला?
पिथौरागढ़ निवासी दर्शन लाल ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र के कई लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया है, लेकिन इसके बावजूद वे पहले की तरह सरकारी योजनाओं, आरक्षण (Reservation Benefits) और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि कुछ लोग धर्म परिवर्तन के बाद मिलने वाले लाभ भी ले रहे हैं और साथ ही पुराने वर्ग के तहत मिलने वाली सरकारी सुविधाएं भी जारी रखे हुए हैं। इससे वास्तविक पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से स्पष्ट पूछा कि ऐसे लोगों की संख्या कितनी है, जो Religion Conversion के बाद भी Government Schemes और Reservation का फायदा उठा रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे मामलों के ठोस उदाहरण हैं तो संबंधित लोगों को केस में पक्षकार बनाया जाए। अदालत ने याची को तीन सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय की है।
धर्मांतरण और आरक्षण पर क्यों बढ़ी बहस?
देश में लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) के बाद आरक्षण और सामाजिक योजनाओं का लाभ जारी रहना चाहिए या नहीं। खासतौर पर SC Reservation को लेकर कानूनी और सामाजिक स्तर पर कई बार सवाल उठ चुके हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि दोहरे लाभ (Double Benefit) की वजह से सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है और वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक लाभ नहीं पहुंच पा रहा।
प्रशासन भी सतर्क
इधर, ऊधमसिंह नगर (US Nagar) प्रशासन ने भी धर्मांतरण, अवैध गतिविधियों और अन्य संवेदनशील मामलों पर सख्ती बढ़ा दी है। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि धर्मांतरण, अवैध नशा, अतिक्रमण और अवैध धार्मिक ढांचों पर कड़ी निगरानी रखी जाए।