Hormuz Strait Crisis: 2 Indian ships leave, Iran Embassy makes big disclosure on fee collection
Strait of Hormuz crisis के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। फारस की खाड़ी में रुके दो भारतीय LPG tankers अब होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर बढ़ चुके हैं। इस बीच सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में सामने आए उस दावे पर भी बहस तेज हो गई, जिसमें कहा गया था कि ईरान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए 2 million dollar toll tax या भारी शुल्क मांग रहा है। हालांकि, भारत में ईरानी दूतावास ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
भारत आ रहे दोनों जहाजों के नाम Pine Gas और Jag Vasant हैं। जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले डेटा के अनुसार, ये दोनों Indian vessels सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए और लगभग साथ-साथ आगे बढ़ते दिखाई दिए। इन जहाजों पर लदी LPG cargo की मात्रा इतनी है कि उससे भारत की लगभग एक दिन की cooking gas demand पूरी की जा सकती है। यही वजह है कि इनकी सुरक्षित आवाजाही को India energy security के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव Rajesh Kumar Sinha ने बताया कि दोनों जहाजों पर करीब 92,000 टन LPG लदी हुई है। उन्होंने कहा कि इनकी यात्रा शुरू हो चुकी है और सामान्य परिस्थितियों में खाड़ी क्षेत्र से भारत पहुंचने में जहाजों को करीब दो से ढाई दिन लगते हैं। हालांकि, किस बंदरगाह से जहाज रवाना हुए, इस बारे में सार्वजनिक रूप से जानकारी साझा नहीं की गई।
Ship tracking data से यह भी संकेत मिला कि होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने से पहले दोनों टैंकर ईरान के Larak और Qeshm islands के बीच वाले समुद्री क्षेत्र से गुजरे। बताया जा रहा है कि इस दौरान जहाजों ने अपनी पहचान और यात्रा से जुड़ी जानकारी ईरानी अधिकारियों के सामने स्पष्ट की। यह प्रक्रिया ऐसे समय हुई, जब West Asia war के बाद फारस की खाड़ी में कई भारतीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, ये दोनों टैंकर उन 22 Indian-flagged ships में शामिल थे, जो क्षेत्रीय तनाव और सीमित maritime movement की वजह से फंस गए थे।
सबसे ज्यादा चर्चा उस दावे को लेकर हुई, जिसमें कहा गया कि ईरान Strait of Hormuz से जहाजों को निकालने के बदले 20 लाख डॉलर ले रहा है। इस पर भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि ऐसे दावे baseless हैं। दूतावास के मुताबिक, इस तरह की बातें कुछ व्यक्तियों की निजी राय हो सकती हैं, लेकिन वे ईरान के आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। ईरान की तरफ से यह भी साफ किया गया कि जहाजों की आवाजाही के लिए पहले से अधिकारियों के साथ prior coordination जरूरी है, लेकिन इसे किसी आधिकारिक transit fee या passage tax के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
इस घटनाक्रम के बीच यह भी याद दिलाया गया कि इससे पहले दो अन्य भारतीय जहाज MT Shivalik और MT Nanda Devi भी सुरक्षित रूप से भारतीय तट तक पहुंच चुके हैं। इन दोनों जहाजों पर कुल मिलाकर करीब 92,712 टन LPG थी, जो देश की लगभग एक दिन की रसोई गैस खपत के बराबर बताई गई। MT Shivalik 16 मार्च को गुजरात के Mundra Port पहुंचा था, जबकि MT Nanda Devi अगले दिन Kandla Port पर पहुंचा। दोनों जहाजों ने 13 मार्च को अपनी यात्रा शुरू की थी और 14 मार्च की सुबह होर्मुज पार कर लिया था।
इसी तरह, संयुक्त अरब अमीरात से करीब 80,886 टन crude oil लेकर चला भारतीय ध्वज वाला oil tanker Jag Ladki 18 मार्च को मुंदड़ा बंदरगाह पहुंच चुका है। वहीं Jag Prakash नाम का एक अन्य टैंकर, जो तंजानिया की ओर जा रहा था, सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुका है। वह ओमान से अफ्रीका के लिए gasoline cargo लेकर रवाना हुआ था। इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि तमाम तनाव के बावजूद कुछ जहाज नियंत्रित और समन्वित तरीके से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने में सफल हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि Hormuz Strait में जहाजों की आवाजाही सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए मायने रखती है। यह मार्ग global oil trade, LPG supply chain, और energy market stability के लिए बेहद अहम है। ऐसे में अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है, तो उसका सीधा असर तेल और गैस की कीमतों के साथ-साथ कई देशों की सप्लाई पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, भारत के लिए राहत की बात यही है कि जरूरी LPG shipments लेकर आ रहे जहाज सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहे हैं और toll tax controversy पर ईरान ने आधिकारिक तौर पर इनकार कर दिया है।