Afghanistan-Pakistan 'Open War': Why is the conflict between the two countries increasing?
Afghanistan और Pakistan के बीच तनाव पिछले कुछ हफ्तों में काफी बढ़ गया है और अब हालात ऐसे बन गए हैं कि इसे लगभग “open war” की स्थिति कहा जा रहा है। पाकिस्तान ने हाल ही में कहा कि वह अपने पड़ोसी देश के खिलाफ खुली लड़ाई लड़ रहा है, जिससे पूरे South Asia और Middle East region में चिंता बढ़ गई है।
Pakistan Air Strikes के बाद बढ़ा संघर्ष
पिछले सप्ताह पाकिस्तान ने Afghanistan में air strikes किए। यह कार्रवाई 26 फरवरी को अफगान सेना द्वारा पाकिस्तान के सीमा चौकियों पर किए गए हमलों के जवाब में बताई गई।
इस बार पाकिस्तान ने केवल सीमावर्ती इलाकों तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि Kabul, Kandahar और Bagram Airbase जैसे प्रमुख ठिकानों को भी निशाना बनाया। इसके जवाब में Kabul ने भी पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को टारगेट किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति पहले होने वाले border skirmishes और परोक्ष लड़ाई से कहीं ज्यादा गंभीर है।
Pakistan के आरोप: Afghanistan में छिपे हैं आतंकी समूह
Islamabad लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि Afghanistan की जमीन का इस्तेमाल कई आतंकी और अलगाववादी संगठन कर रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से
Tehreek-e-Taliban Pakistan (TTP)
Balochistan Liberation Army (BLA)
जैसे समूह शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 2025 में पाकिस्तान के अंदर terror attacks में 34% की वृद्धि हुई, जिसका जिम्मेदार इन संगठनों को बताया जाता है। हालांकि Taliban सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।
Taliban की ‘Asymmetric Warfare’ क्षमता
भले ही पाकिस्तान की सैन्य ताकत अफगानिस्तान से ज्यादा मानी जाती है, लेकिन Taliban के पास guerrilla tactics और asymmetric warfare की मजबूत क्षमता है।
उदाहरण के तौर पर नवंबर में Islamabad district court के बाहर TTP suicide attack हुआ था, जिसने यह दिखाया कि यह संगठन सीमावर्ती क्षेत्रों से बाहर भी सक्रिय हो चुका है।
Afghan Refugees संकट से बढ़ा तनाव
दोनों देशों के बीच तनाव की एक बड़ी वजह Afghan refugees crisis भी है।
2025 में करीब 2.7 million अफगान नागरिक पाकिस्तान और ईरान से वापस Afghanistan लौटे। इससे पहले से कमजोर अफगान अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं पर भारी दबाव पड़ गया है।
पाकिस्तान द्वारा Afghan refugees की deportation जारी रहने से यह संकट और गहरा सकता है।
Border Closure से Afghanistan की अर्थव्यवस्था प्रभावित
अक्टूबर में पाकिस्तान ने Afghanistan-Pakistan border बंद कर दिया था और व्यापार भी रोक दिया।
Afghanistan एक landlocked country है, इसलिए उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस फैसले से अफगान अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है।
Durand Line विवाद: पुराने घाव फिर हरे
Afghanistan-Pakistan conflict की जड़ें काफी पुरानी हैं। दोनों देशों के बीच Durand Line को लेकर दशकों से विवाद है।
यह लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है जिसे 1893 में खींचा गया था। Afghanistan आज भी इसे आधिकारिक सीमा के रूप में स्वीकार नहीं करता, क्योंकि यह Pashtun आबादी वाले क्षेत्रों को दो हिस्सों में बांटती है।
इसी वजह से 1947 में Pakistan के United Nations membership के खिलाफ वोट देने वाला Afghanistan एकमात्र देश था।
India-Pakistan Rivalry का भी असर
अफगानिस्तान लंबे समय से India-Pakistan geopolitical rivalry का हिस्सा रहा है।
पहले Pakistan पर आरोप लगता था कि वह Taliban का इस्तेमाल करके Afghanistan में strategic depth हासिल करना चाहता है।
वहीं अब Pakistan आरोप लगा रहा है कि India, Kabul के साथ संबंध मजबूत करके Afghanistan को अपने प्रभाव में ला रहा है।
हाल ही में India ने Kabul में अपनी embassy फिर से खोल दी, जिससे Pakistan में नई चिंता पैदा हुई है।
Regional Impact: Pakistan की रणनीतिक चुनौतियां
Pakistan हाल के वर्षों में Middle East geopolitics में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
सितंबर में Pakistan और Saudi Arabia ने Strategic Mutual Defence Agreement पर हस्ताक्षर किए।
जनवरी में Pakistan Board of Peace initiative में भी शामिल हुआ।
लेकिन Afghanistan के साथ बढ़ते तनाव ने Pakistan की regional ambitions को चुनौती दे दी है।
De-escalation का रास्ता क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट को कम करने के लिए कुछ कदम जरूरी हो सकते हैं:
Pakistan द्वारा border reopening और trade restoration
Afghanistan द्वारा अपने क्षेत्र में मौजूद militant groups पर कार्रवाई
China या Gulf countries द्वारा diplomatic mediation
हालांकि फिलहाल दोनों देशों के रुख को देखते हुए de-escalation की संभावना सीमित नजर आती है।
Afghanistan-Pakistan conflict अब केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह regional security crisis का रूप ले चुका है।
अगर जल्द ही diplomatic solution नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष पूरे South Asia और Central Asia की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।