BJP Internal Politics: Trivendra Rawat and Anil Baluni enter the picture in the Arvind Pandey case.
उत्तराखंड भाजपा की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। Uttarakhand BJP के सीनियर नेता, गदरपुर से विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे (Arvind Pandey) इन दिनों land encroachment dispute को लेकर विवादों में घिरे हुए हैं। इसी बीच खबर है कि केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के उत्तराखंड दौरे के बाद भाजपा के चार बड़े नेता अरविंद पांडे से मुलाकात करने जा रहे हैं, जिसे पार्टी के भीतर internal politics से जोड़कर देखा जा रहा है।
भूमि अतिक्रमण विवाद से बढ़ी सियासी हलचल
बाजपुर के विचपुरी गांव की 68 वर्षीय महिला ने अरविंद पांडे पर land lease dispute में गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि विधायक ने लीज से अधिक भूमि पर अवैध कब्जा किया और उन्हें धमकाया गया। इस शिकायत के बाद जिला प्रशासन की ओर से अरविंद पांडे के आवास पर encroachment removal notice चस्पा किया गया, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
अरविंद पांडे ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए high-level inquiry की मांग की है। हालांकि नोटिस जारी होने के बाद से वे सरकार और प्रशासन की कार्रवाई से नाराज बताए जा रहे हैं, वहीं उनके समर्थकों में भी रोष देखा जा रहा है।
अमित शाह के दौरे के बाद क्यों अहम मानी जा रही है मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हरिद्वार दौरे से लौटने के तुरंत बाद भाजपा के चार दिग्गज नेता अरविंद पांडे से मिलने जाएंगे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद Trivendra Singh Rawat, गढ़वाल सांसद Anil Baluni, हरिद्वार विधायक Madan Kaushik और डीडीहाट विधायक Bishan Singh Chufal शामिल हैं।
यह मुलाकात सामान्य नहीं मानी जा रही है, क्योंकि इसका schedule public किया जा चुका है। तय कार्यक्रम के अनुसार, सभी नेता उधम सिंह नगर में अरविंद पांडे के आवास पर करीब एक घंटे तक बैठक करेंगे। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा के भीतर चल रही discontent management की कवायद मान रहे हैं।
BJP के लिए पीछा नहीं छोड़ रहे विवाद
पिछले कुछ महीनों से भाजपा उत्तराखंड में लगातार विवादों से घिरी रही है। पहले Ankita Bhandari murder case, फिर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति के विवादित बयान और उसके बाद उधम सिंह नगर में किसान आत्महत्या का मामला। अब अरविंद पांडे पर भूमि अतिक्रमण का आरोप और नोटिस, पार्टी के लिए नई मुश्किल बन गया है।
अरविंद पांडे पहले भी Dhami Government के खिलाफ खुलकर बयान दे चुके हैं और कई मामलों में CBI inquiry की मांग कर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन की हालिया कार्रवाई को उनके समर्थक सरकार की political pressure tactics के रूप में देख रहे हैं।
मनाने की कोशिश या नया सियासी समीकरण?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात अरविंद पांडे की नाराजगी दूर करने और उन्हें पार्टी लाइन में बनाए रखने की कोशिश हो सकती है। वहीं कुछ इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ संभावित power grouping के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। हाल के दिनों में त्रिवेंद्र रावत, अनिल बलूनी और अन्य नेताओं के बीच बढ़ती सक्रियता ने इन अटकलों को और हवा दी है।
क्या है पूरा मामला
प्रशासन ने गदरपुर विधायक अरविंद पांडे को भूमि पर अतिक्रमण के आरोप में 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब वे किसान आत्महत्या मामले में सरकार से CBI जांच की मांग कर रहे थे। इसी कारण इस पूरे घटनाक्रम के political implications निकाले जा रहे हैं।
कौन हैं अरविंद पांडे
अरविंद पांडे उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 20 मई 1971 को हुआ था। वे उधम सिंह नगर जिले की गदरपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं।
1997 में वे तत्कालीन उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के नगर पालिका अध्यक्ष बने थे। त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में वे Education, Sports, Youth Welfare और Panchayati Raj जैसे अहम विभागों के मंत्री रहे। हालांकि 2022 में पांचवीं बार विधायक बनने के बावजूद उन्हें धामी कैबिनेट में जगह नहीं मिली।
अब देखना यह होगा कि भाजपा के ये चार बड़े नेता अरविंद पांडे की नाराजगी दूर कर पाते हैं या यह मुलाकात उत्तराखंड की राजनीति में किसी नए सियासी समीकरण की शुरुआत साबित होती है।