A leak in a railway tunnel caused a collapse; a technical team took charge.
Rishikesh Karnaprayag Rail Tunnel प्रोजेक्ट से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के Rudraprayag जिले में निर्माणाधीन railway tunnel के एक हिस्से में subsidence यानी धंसाव की घटना हुई है। यह घटना Rishikesh-Karnaprayag Rail Line Project के तहत बन रही Emergency Tunnel (7B Package) में हुई।
घटना के बाद संबंधित हिस्से में movement पर रोक लगा दी गई है और फिलहाल केवल technical inspection team को ही सीमित प्रवेश की अनुमति दी गई है। राहत की बात यह रही कि समय रहते सतर्कता बरतने के कारण किसी प्रकार की casualty या major accident नहीं हुआ।
देर रात हुई घटना, मजदूरों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार देर रात करीब 11:30 बजे हुई। धंसाव का यह मामला Jawadi Chowki से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर निर्माण स्थल पर सामने आया।
बताया गया कि सुरंग के ऊपरी हिस्से से अचानक water seepage और soil leakage शुरू हुआ, जिससे अंदर का एक हिस्सा प्रभावित हो गया। वहां मौजूद मजदूरों ने स्थिति को समझते ही शोर मचाकर बाकी श्रमिकों को सतर्क किया, जिससे समय रहते सभी लोग सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए।
यानी, अगर यह अलर्ट कुछ देर से होता, तो मामला कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता था।
धंसाव के बाद प्रभावित हिस्से में आवाजाही पूरी तरह रोकी गई
घटना के बाद जिस हिस्से में tunnel subsidence हुआ, वहां एहतियात के तौर पर entry and movement रोक दी गई है। सुरक्षा के मद्देनजर आम श्रमिकों और अन्य स्टाफ की आवाजाही फिलहाल बंद रखी गई है।
अब सिर्फ technical experts और चुनिंदा मजदूरों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है, ताकि स्थिति का आकलन कर जरूरी stabilization work किया जा सके।
हालांकि, प्रोजेक्ट के अन्य सुरक्षित हिस्सों और वैकल्पिक मार्गों पर construction activity जारी रहने की बात कही गई है।
जांच में सामने आई वजह: पानी और मिट्टी का रिसाव
इस घटना की वजह को लेकर निर्माणकर्ता संस्था Mega Company की ओर से प्रारंभिक जानकारी दी गई है। कंपनी के Public Relations Officer के मुताबिक, main tunnel और escape tunnel के बीच स्थित हिस्से में water infiltration हुआ था।
बताया गया कि cross passage में पानी जमा हो गया, जिसके कारण वहां से mud and water seepage शुरू हुआ। इसी वजह से सुरंग के एक हिस्से में हल्का soil fall हुआ और धंसाव जैसी स्थिति बनी।
कंपनी का कहना है कि इस घटना से main tunnel और escape tunnel की संरचना को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन प्रभावित हिस्से को तत्काल technical treatment की जरूरत है।
तकनीकी टीम ने शुरू किया Treatment Work
घटना के अगले ही दिन विशेषज्ञ टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित हिस्से का treatment work शुरू कर दिया। कंपनी का कहना है कि अगले 3 से 4 दिनों के भीतर इस हिस्से को स्थिर करने और सुरक्षित बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा।
इसमें आमतौर पर soil stabilization, water control, reinforcement, और structural safety assessment जैसे काम शामिल होते हैं। फिलहाल तकनीकी टीम यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि आगे कोई दूसरा हिस्सा प्रभावित न हो।
पुलिस और प्रशासन ने भी किया निरीक्षण
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी हरकत में आ गए। Deputy Superintendent of Police (DSP) Vikas Pundir ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया।
प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल worker safety, site security, और further risk assessment पर केंद्रित है। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं सुरंग के आसपास या ऊपरी सतह पर कोई और geological weakness तो मौजूद नहीं है।
Rishikesh-Karnaprayag Rail Project क्यों है इतना अहम?
Rishikesh-Karnaprayag Rail Line Project उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण infrastructure projects में से एक माना जाता है। यह परियोजना राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों को बेहतर rail connectivity देने के साथ-साथ भविष्य में Char Dham access और regional mobility को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
यही वजह है कि इस तरह की किसी भी tunnel safety incident को सिर्फ निर्माण से जुड़ी तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी तरफ श्रीनगर में मुआवजे को लेकर बढ़ा विवाद
इसी प्रोजेक्ट से जुड़ा एक दूसरा विवाद भी सामने आया है। Srinagar क्षेत्र में Revdi Kandai Teachers Colony के प्रभावित लोगों ने रेलवे निर्माण कार्य रुकवा दिया। उनका आरोप है कि पिछले साल हुए land subsidence और blasting impact की वजह से उनके कई घर क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन अब तक उन्हें उचित compensation नहीं मिला।
स्थानीय प्रभावितों ने railway construction work को रोकने के साथ-साथ निर्माण संस्था के कार्यालयों में lockdown protest भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके आवासीय भवनों को गंभीर नुकसान पहुंचा, लेकिन रेलवे और प्रशासन की ओर से ठोस राहत नहीं दी गई।
नौ मकानों को हुआ था भारी नुकसान
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष Ghasia Mahadev स्थित Teachers Colony में हुए bhudansav यानी भू-धंसाव के चलते कम से कम 9 मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि रेलवे निर्माण के दौरान हुई blasting activity ने जमीन की स्थिरता को प्रभावित किया, जिसका असर उनके घरों पर पड़ा। अब वे प्रशासन और रेलवे विभाग से time-bound compensation और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।
एक प्रोजेक्ट, दो बड़ी चिंताएं: Safety और Compensation
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पहाड़ी राज्यों में बड़े infrastructure projects के दौरान geological sensitivity, public safety, और community compensation को कितना गंभीरता से लिया जा रहा है।
एक ओर सुरंग में धंसाव जैसी तकनीकी चुनौती सामने आई है, तो दूसरी ओर स्थानीय लोग blast impact और property damage को लेकर विरोध कर रहे हैं। इससे यह साफ है कि सिर्फ प्रोजेक्ट की गति ही नहीं, बल्कि उसकी ground safety और social accountability भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
Rishikesh Karnaprayag Rail Tunnel Incident ने इस महत्वाकांक्षी रेलवे प्रोजेक्ट की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण गुणवत्ता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि फिलहाल किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन water seepage, soil fall, और restricted movement जैसी घटनाएं यह बताती हैं कि परियोजना के संवेदनशील हिस्सों में बेहद सतर्कता की जरूरत है।
वहीं, श्रीनगर में मुआवजे को लेकर उठे विरोध ने यह भी दिखाया है कि बड़े infrastructure projects को केवल इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि public trust और local impact management के साथ आगे बढ़ाना होगा।