Uttarakhand News: Government's major initiative to conserve 13 rivers across 13 districts; monitoring to continue for 10 years.
उत्तराखंड में लगातार घटते जल प्रवाह और सूखते जल स्रोतों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। Spring and River Rejuvenation Authority (SARA) ने One District One River मॉडल के तहत प्रदेश के सभी 13 जिलों से एक-एक नदी का चयन किया है। इन नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए देश के प्रतिष्ठित National Research Institutes और विशेषज्ञ संस्थानों से वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य केवल नदियों में जल प्रवाह बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे Water Ecosystem को मजबूत करना है।
One District One River मॉडल पर होगा काम
नई योजना के तहत प्रत्येक जिले की ऐसी नदी चुनी गई है, जहां जल प्रवाह में कमी या जल स्रोतों के कमजोर होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। विशेषज्ञ केवल नदी का ही अध्ययन नहीं करेंगे, बल्कि उसके Catchment Area, Groundwater Recharge, वर्षा जल संचयन, झीलों, तालाबों और अन्य जल निकायों का भी विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
सरकार का मानना है कि पूरे जल तंत्र को एक साथ मजबूत किए बिना नदियों का स्थायी पुनर्जीवन संभव नहीं है।
वैज्ञानिक आधार पर तैयार होगी विस्तृत रिपोर्ट
State Agency for Rejuvenation and Augmentation of Water Sources (SARA) पिछले कई वर्षों से झरनों और जल स्रोतों के संरक्षण पर काम कर रही है। अब पहली बार पूरे राज्य की 13 प्रमुख नदियों के लिए व्यापक Scientific Assessment कराया जाएगा।
अध्ययन के बाद विशेषज्ञ विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसमें नदी संरक्षण, जल संरक्षण उपाय, भूजल पुनर्भरण, संरचनात्मक सुधार और दीर्घकालिक रणनीति का पूरा खाका होगा।
इन संस्थानों को मिली अलग-अलग नदियों की जिम्मेदारी
परियोजना के तहत विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों को अलग-अलग जिलों की नदियों का अध्ययन सौंपा गया है।
GB Pant National Institute of Himalayan Environment अल्मोड़ा की जटा गंगा, बागेश्वर की गरुड़ गंगा और पिथौरागढ़ की पूर्वी रामगंगा का अध्ययन करेगा।
IIT Roorkee नैनीताल की शिप्रा नदी, चंपावत की गौड़ी नदी और उधम सिंह नगर की फीका नदी पर अध्ययन करेगा। फीका नदी के अध्ययन में Earth Science Experts भी सहयोग करेंगे।
National Institute of Hydrology (NIH), Roorkee पौड़ी की नयार पूर्वी, नयार पश्चिमी और टिहरी-देहरादून से जुड़ी सोंग नदी का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा।
Forest Research Institute (FRI), Dehradun चमोली की चंद्रभागा नदी और रुद्रप्रयाग की पुनार नदी का अध्ययन करेगा।
Indian Institute of Soil and Water Conservation उत्तरकाशी की कमल गंगा का अध्ययन करेगा, जबकि Wildlife Institute of India (WII) हरिद्वार की पथरी नदी पर शोध करेगा।
जल प्रवाह में कमी के कारण तलाशेंगे विशेषज्ञ
विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि किन कारणों से इन नदियों का जल प्रवाह कम हुआ है। अध्ययन में जलग्रहण क्षेत्र, भूजल स्तर, वर्षा जल संचयन, झीलों और तालाबों की स्थिति तथा आसपास के पर्यावरण का गहन विश्लेषण किया जाएगा।
इन निष्कर्षों के आधार पर प्रत्येक नदी के लिए अलग-अलग River Rejuvenation Strategy तैयार होगी।
तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर बनेंगी परियोजनाएं
अध्ययन पूरा होने के बाद संबंधित संस्थान विस्तृत Technical Report तैयार करेंगे। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर जिला स्तरीय समितियां परियोजना प्रस्ताव तैयार कर SARA Headquarters को भेजेंगी।
यदि किसी परियोजना की लागत 10 करोड़ रुपये से अधिक होगी तो उसे मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की मंजूरी लेनी होगी। वहीं 10 करोड़ रुपये तक की योजनाओं को सचिव स्तर पर स्वीकृति दी जा सकेगी।
10 वर्षों तक होगी निगरानी
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि परियोजना पूरी होने के बाद भी उसका प्रभाव लगातार परखा जाएगा। SARA के जिला स्तरीय विशेषज्ञ अगले 10 वर्षों तक इन परियोजनाओं की Monitoring करेंगे।
इस दौरान यह मूल्यांकन किया जाएगा कि उठाए गए कदमों से नदी के जल प्रवाह, भूजल स्तर और स्थानीय पर्यावरण में कितना सुधार हुआ।
स्थानीय समुदाय की होगी अहम भूमिका
सरकार इस अभियान में स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगी। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी Water Conservation Project की सफलता तभी संभव है, जब ग्रामीण और स्थानीय समुदाय उसे अपनी जिम्मेदारी मानकर सहयोग करें।
इससे जल संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
SARA अधिकारियों ने क्या कहा?
SARA की ACEO कहकशां नसीम के अनुसार, One District One River कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की एजेंसियां अध्ययन करेंगी। इनसे प्राप्त निष्कर्ष उत्तराखंड की नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
वहीं Geo-Hydrologist शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि राज्य में जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर लगातार वैज्ञानिक अध्ययन किए जा रहे हैं। ऐसे अध्ययन अधिकारियों और विशेषज्ञों को Hydrogeology को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद कर रहे हैं।