Occupying government land and forging documents! Uttarakhand HC asks, "How did you become an Indian?"
चारधाम यात्रा मार्ग पर कथित तौर पर 600 घोड़ों की मौत के मामले में Nainital स्थित उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से कड़ा जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों और केंद्र व राज्य सरकार की ओर से यात्रा को सरल, सुगम और शांतिपूर्ण बनाने के लिए जारी एसओपी का कितना पालन किया गया है।
22 अप्रैल से शुरू होगी यात्रा
इस वर्ष Char Dham Yatra 22 अप्रैल से शुरू हो रही है। यात्रा शुरू होने से पहले कोर्ट ने व्यवस्थाओं की समीक्षा को गंभीरता से लिया है, ताकि मार्ग में चलने वाले पशुओं और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि चारधाम यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं। याचिका में लगाए गए आरोपों पर सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी निर्देश दिया है कि वे यात्रा को पर्यावरण के अनुकूल, सरल और सुरक्षित बनाने के सुझाव 16 मार्च से पहले प्रस्तुत करें।
याचिका में क्या उठाए गए मुद्दे?
याचिकाकर्ता गौरी मौलेखी और अजय गौतम ने जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि अब तक लगभग 600 घोड़ों की मौत हो चुकी है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा भी उत्पन्न हो गया है।
याचिका में प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
घोड़े-खच्चरों से रात में काम न लिया जाए
उनकी क्षमता के अनुसार ही भार लादा जाए
एक दिन में केवल एक चक्कर लगवाया जाए
यात्रा शुरू होने से पहले दैनिक स्वास्थ्य परीक्षण हो
गर्म पानी, ठहरने की व्यवस्था और पर्याप्त पशु चिकित्सक उपलब्ध हों
यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या मार्ग की क्षमता के अनुसार तय की जाए
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पशुओं और श्रद्धालुओं दोनों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।