देहरादून में मस्जिद निर्माण को लेकर हंगामा, बजरंग दल ने रुकवाया काम

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शिमला बाईपास स्थित सेवला कलां क्षेत्र में मंगलवार को एक मस्जिद में निर्माण कार्य को लेकर विवाद हो गया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर निर्माण पर आपत्ति जताई और अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए काम रुकवा दिया। वहीं, मुस्लिम सेवा संगठन ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि वहां कोई नया निर्माण नहीं हो रहा था, बल्कि पानी के रिसाव की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत का काम किया जा रहा था।

तीसरी मंजिल पर काम को लेकर हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, धार्मिक स्थल की तीसरी मंजिल पर काम चल रहा था। इसकी सूचना मिलने के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता दोपहर में मौके पर पहुंचे। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि निर्माण के दौरान सड़क पर अतिक्रमण किया गया है, जिससे रास्ता बाधित हो रहा है। इस मुद्दे पर मौके पर हंगामा हुआ और निर्माण कार्य रुकवा दिया गया।

मामले की सूचना मिलने पर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA), पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया। अब मामले में निर्माण की वैधता और अतिक्रमण से जुड़े आरोपों की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बजरंग दल ने की संपत्ति की जांच की मांग

बजरंग दल के प्रांत मिलन प्रमुख विकास वर्मा ने दावा किया कि संबंधित स्थल पर वर्ष 2017 से अवैध निर्माण किया जा रहा है और निर्माण अब तीन मंजिल तक पहुंच गया है। उन्होंने पूरी संपत्ति की जांच कराने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि जांच में निर्माण अवैध पाया जाता है तो नियमानुसार उसे हटाया जाना चाहिए।

विकास वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन बड़ा आंदोलन करेगा। मौके पर हुए हंगामे के दौरान आशीष बलूनी, रोहित मौर्य, राघव उपाध्याय और यशवंत मौर्य सहित संगठन के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

MDDA ने कही नियमानुसार कार्रवाई की बात

मामले पर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर प्राधिकरण के स्तर से नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। निर्माण से संबंधित शिकायतों पर आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित नियमों के आधार पर की जाएगी।

मुस्लिम सेवा संगठन ने आरोपों को नकारा

दूसरी ओर, मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी और उपाध्यक्ष आकिब कुरैशी ने निर्माण को लेकर लगाए गए आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि धार्मिक स्थल पर कोई नया निर्माण नहीं किया जा रहा था। उनके मुताबिक, स्थल वैध है और नियमों के तहत बना हुआ है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित प्राधिकरण के अधिकारियों को इसके दस्तावेज भी दिखाए गए हैं।

संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, लिंटर से पानी टपकने की समस्या के कारण उस पर सीमेंट डालने का काम किया जा रहा था। इस तरह एक ही निर्माण कार्य को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। फिलहाल, मामले में निर्माण की स्थिति और अतिक्रमण के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।