Ram Mandir Donation Theft Case: Seven key questions before the new SIT; status report to be presented in the Supreme Court today.
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा (donation) चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच तेज हो गई है। इस मामले में SIT (Special Investigation Team) ने प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें कई गंभीर गड़बड़ियों और प्रबंधन से जुड़ी खामियों के संकेत सामने आए हैं।
SIT रिपोर्ट में क्या सामने आया?
SIT की जांच रिपोर्ट के अनुसार मंदिर में आने वाले चढ़ावे की प्रक्रिया—जैसे कि cash donation counters, hundi system और online donation—तीनों में रिकॉर्डिंग और निगरानी को लेकर कई असंगतियां पाई गई हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि:
हर महीने औसतन 25 लाख श्रद्धालु मंदिर दर्शन के लिए आते हैं
कुंभ जैसे अवसरों पर यह संख्या करीब 1 करोड़ तक पहुंच जाती है
प्रति श्रद्धालु औसतन 15–18 रुपये चढ़ावा दर्ज किया गया है
चढ़ावे के रिकॉर्ड और वास्तविकता में अंतर
SIT को बैंक स्टेटमेंट, श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे के रिकॉर्ड में असंतुलन मिला है। जांच में यह भी सामने आया कि कई महीनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के बावजूद चढ़ावे की राशि अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार उस दौरान
नकद की बजाय सिक्कों का अधिक उपयोग दिखाया गया
कुछ दान सामग्री (सोना, चांदी, तेल, अनाज) का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला
कर्मचारियों और प्रबंधन पर सवाल
रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में यह सामने आया कि कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए लिखित आदेश तक मौजूद नहीं थे।
इसके अलावा SIT ने इन नामों की भूमिका को जांच के दायरे में रखा है:
चंपत राय (महासचिव, ट्रस्ट)
अनिल मिश्रा
गोपाल राव (निर्माण सहायक)
CCTV फुटेज और संपत्ति में बढ़ोतरी पर भी जांच
SIT जांच में यह भी पाया गया कि:
CCTV फुटेज में कुछ गड़बड़ी और छेड़छाड़ के संकेत मिले
60 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई
कुछ कर्मचारियों की संपत्ति में पिछले 5 वर्षों में असामान्य वृद्धि देखी गई
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संभावित रूप से 25–30 लोगों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है और उनके खिलाफ FIR की सिफारिश की गई है।
चढ़ावे की गणना पर सबसे बड़ा सवाल
SIT ने अपनी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि चढ़ावे की सटीक गणना करना मुश्किल है, क्योंकि:
श्रद्धालु द्वारा दिए गए दान का कोई एकीकृत रिकॉर्ड नहीं है
विभिन्न माध्यमों से आने वाले दान का मिलान ठीक से नहीं हुआ
निगरानी प्रणाली (monitoring system) कमजोर पाई गई
प्रारंभिक SIT रिपोर्ट ने मंदिर प्रबंधन और चढ़ावा प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अभी यह preliminary findings हैं और अंतिम रिपोर्ट में स्थिति और स्पष्ट होगी।
जांच पूरी होने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि अनियमितता किस स्तर पर हुई है और किसकी जिम्मेदारी तय होती है।