Kainchi Dham: कैंची धाम में आज से नया ट्रैफिक प्लान, 8 नवंबर तक कई रास्ते बंद, इन वाहनों की नो एंट्री
Kainchi Dham Traffic Plan: धनतेरस और वीकेंड पर कैंची धाम, भवाली और भीमताल क्षेत्र में संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस ने छह से आठ नवंबर तक यातायात प्लान लागू किया है। कई रास्तों पर पाबंदी रहेगी, साथ ही सुबह तीन से रात 11 बजे तक भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
पुलिस-प्रशासन ने शहर की यातायात व्यवस्था में बदलाव किया है। आज शुक्रवार से आठ नवंबर तक लगातार तीन दिन के लिए विशेष डायवर्जन प्लान लागू रहेगा। इस दौरान सुबह नौ बजे से रात दस बजे तक शहर में डायवर्जन व्यवस्था प्रभावी रहेगी, जबकि सुबह छह बजे से रात 11 बजे तक सभी छोटे-बड़े मालवाहक वाहनों का शहर में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। जरूरी सामानों की आपूर्ति करने वाले वाहनों को भी बाईपास रास्तों से ही भेजा जाएगा।
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भारी वाहनों को डायवर्ट किया जाएगा
सुबह पांच से रात आठ बजे तक बसों और चौपहिया वाहनों को डायवर्ट किया जाएगा। पहाड़ी जिलों से मैदानी क्षेत्रों को जाने वाले वाहन लमगड़ा, धनाचूली, धारी, खुटानी और भीमताल मार्ग से जाएंगे। काठगोदाम से रानीखेत जाने वाले वाहन मुक्तेश्वर-रामगढ़ मार्ग अपनाएंगे। भीमताल से आने वाले निजी वाहन विकास भवन और ज्योलीकोट, गेठिया व नैनीताल की ओर से आने वाले वाहन भवाली सैनिटोरियम पार्किंग में खड़े होंगे। यहां से शटल सेवा मिलेगी। टैक्सी और दोपहिया वाहनों का कैंची धाम क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। स्थानीय वाहन खैरना, गरमपानी और बेतालघाट जाने के लिए दूनीखाल-रातीघाट मार्ग का उपयोग कर सकेंगे।
आज रहेगा डायवर्जन
धनतेरस पर्व को लेकर बाजारों में बढ़ी चहल-पहल के बीच शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। गुरुवार को सुबह से लेकर देर शाम तक शहर की प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं शहर के मुख्य मार्गों पर दिनभर वाहन रेंगते रहे।
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नैनीताल रोड पर डीएम आवास से लेकर रोडवेज बस स्टेशन तक और आगे बेस अस्पताल से सिंधी चौराहे तक गाड़ियां जाम में फंसी रहीं। रामपुर रोड में सिंधी चौराहे से लेकर एचएन इंटर कॉलेज तक और आगे एसटीएच से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय मार्ग तक यातायात बाधित रहा। कालाढूंगी मार्ग में जेल रोड तिराहे से पर्वतीय उत्थान मंच मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। मुखानी चौराहे से लेकर ऊंचापुल तक भीषण जाम की स्थिति बनी रही, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों का समय बर्बाद हुआ। एसपी सिटी हरबंस सिंह ने बताया कि त्योहारों के मद्देनजर बाजार में बढ़ी भीड़ के कारण यातायात का दबाव बढ़ा है। जाम से निपटने और शहर में यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
बाजार में वाहनों की ‘नो एंट्री’ और पार्किंग व्यवस्था
मंगलपड़ाव, सिंधी चौराहा, सिटी चौराहा, कालाढूंगी चौराहा, ओके होटल और ताज चौराहे से बाजार के अंदर किसी भी वाहन का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। वहीं बरेली रोड के वाहन लक्ष्मी शिशु मंदिर मैदान में पार्क होंगे। रामपुर रोड के वाहन एचएन इंटर कॉलेज परिसर में पार्क किए जाएंगे। कालाढूंगी रोड के वाहन हीरानगर स्थित निर्धारित पार्किंग स्थल पर खड़े होंगे। मुख्य बाजार जाने वाले वाहन रामलीला मैदान और रेलवे स्टेशन परिसर में पार्क किए जाएंगे।
ऑटो व ई-रिक्शा
ऑटो, ई-रिक्शा और मैजिक स्टैंड का संचालन भी अपने तय वैकल्पिक स्थानों से ही किया जाएगा। एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने लोगों और त्योहार पर खरीदारी करने आ रहे लोगों से अपील की है कि वे जाम से बचने के लिए दिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने और अपने वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करने की अपील की है।
ये किया गया है बदलाव
● रामपुर रोड से आने वाली बसें टीपीनगर तिराहे से होंडा शोरूम होते हुए गौलापार रोड से शहर में प्रवेश करेंगी।
● बरेली रोड से आने वाली बसें तीनपानी फ्लाईओवर से गौलापार रोड होकर नारीमन तिराहे से सीधे रोडवेज स्टेशन तक पहुंचेंगी।
● कालाढूंगी रोड की बसें लालडांठ और ऊंचापुल से पनचक्की मार्ग होते हुए शहर में आ सकेंगी।
● पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाली रोडवेज और केमू बसें तिकोनिया से होकर सीधे रोडवेज स्टेशन पहुंचेंगी।
● पहाड़ी क्षेत्रों की ओर जाने वाले छोटे वाहनों को गौलापार रोड से डायवर्ट कर भेजा जाएगा।
Naib Subedar Ramesh Rawat from Kashipur martyred in Siachen; underwent treatment in hospital for two months
उत्तराखंड के काशीपुर निवासी नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। वह सियाचिन ग्लेशियर में 16वीं गढ़वाल राइफल्स की बी कंपनी में तैनात थे। अत्यधिक ठंड और माइनस तापमान के बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उनके मस्तिष्क में खून का थक्का जमने के बाद उन्हें सेना के हेलीकॉप्टर से कमांड अस्पताल, चंडीगढ़ पहुंचाया गया था। यहां करीब दो महीने तक उनका उपचार चला, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर काशीपुर पहुंचा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके निधन की खबर से परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर है।
सियाचिन में बिगड़ी थी तबीयत, चंडीगढ़ में चल रहा था इलाज
नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत सियाचिन ग्लेशियर में देश की सुरक्षा में तैनात थे। वहां अत्यधिक ठंड और माइनस तापमान के बीच उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। बताया गया कि उनके मस्तिष्क में रक्त का थक्का जम गया था।
गंभीर हालत को देखते हुए सेना ने उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए कमांड अस्पताल, चंडीगढ़ पहुंचाया। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में करीब दो महीने तक उनका इलाज चला। हालांकि, लंबे उपचार के बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
सैन्य सम्मान के साथ निकली अंतिम यात्रा
गुरुवार सुबह जैसे ही रमेश रावत का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा, परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पूर्व सैनिक और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
इसके बाद उनके घर से सैन्य सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। रास्ते में लोगों ने पुष्प वर्षा कर वीर जवान को श्रद्धांजलि दी। ढेलापुर घाट पर सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया, जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया।
पत्नी, बेटा और बेटी को छोड़ गए पीछे
नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत के परिवार में उनकी मां राजेश्वरी, पिता ख्याति सिंह रावत, पत्नी भारती, बेटा समीर और बेटी दीया हैं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पूर्व सैनिक संगठन काशीपुर के अध्यक्ष चंद्र सिंह रावत ने कहा कि देश के लिए रमेश रावत का योगदान और उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
जनप्रतिनिधियों और पूर्व सैनिकों ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम विदाई के दौरान विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, महापौर दीपक बाली, पार्षद संजय शर्मा, एसडीएम अभय प्रताप सिंह और तहसीलदार पंकज चंदोला समेत कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
सेना के स्टेशन हेडक्वार्टर का फ्यूनरल गार्ड, 16वीं गढ़वाल राइफल्स के जवान, स्थानीय पुलिस और काशीपुर, कुंडेश्वरी तथा पीरूमदारा के पूर्व सैनिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने नम आंखों से वीर जवान को अंतिम विदाई दी।