खड़गे के बयान से चुनावी प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल, उत्तराखंड SIR भी चर्चा में

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 3 अक्टूबर को कर्नाटक के कलबुर्गी में देश में हुए चुनावों को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण मौजूदा सरकारें और निर्वाचित प्रतिनिधि वैध नहीं हैं तथा लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं को भंग कर नए चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। खड़गे ने EVM के कथित दुरुपयोग और Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियों का भी आरोप लगाया।

खड़गे के इस बयान के बाद उत्तराखंड में भी SIR के बाद बदली मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। राज्य में SIR शुरू होने के समय 79,60,762 मतदाता दर्ज थे, जबकि 3 अक्टूबर को जारी अंतिम सूची में 71,58,949 मतदाता हैं। संशोधन प्रक्रिया के दौरान 1,29,872 नए नाम जोड़े गए, जबकि बड़ी संख्या में पुराने रिकॉर्ड हटाए गए। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक हटाए गए नामों में मृतक, डुप्लीकेट, स्थानांतरित और अन्य कारणों से अयोग्य पाए गए रिकॉर्ड शामिल हैं।

ऐसे में उत्तराखंड में भी यह सवाल राजनीतिक रूप से उठ रहा है कि SIR के बाद मतदाता संख्या में इतनी बड़ी कमी क्यों आई और जिन लोगों के नाम सूची से बाहर हुए, उन्हें दोबारा शामिल होने का क्या रास्ता मिलेगा। चुनाव आयोग ने पुराने रिकॉर्ड में छूटे पात्र मतदाताओं की पहचान और जरूरत पड़ने पर Form 6 के जरिए दोबारा नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, SIR के आंकड़ों में कमी अपने-आप 2024 के लोकसभा चुनाव को अवैध साबित नहीं करती; चुनाव की वैधता पर अंतिम निष्कर्ष के लिए संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया अलग विषय है।