Jagdeep Dhankhar Controversy: While being the Vice President, he wanted his photo with the PM and the President, also demanded a Mercedes in the convoy?
भारत के उपराष्ट्रपति पद से Jagdeep Dhankhar के अचानक इस्तीफे ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। अब धीरे-धीरे धनखड़ और केंद्र सरकार के बीच टकराव के कथित कारण सामने आ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ सरकार से कई मुद्दों पर असहमति रखते थे—यहां तक कि उन्होंने कुछ असामान्य मांगें भी रखी थीं।
दफ्तरों में पीएम और राष्ट्रपति के साथ अपनी Photo चाहते थे धनखड़?
India Today की एक रिपोर्ट के अनुसार, धनखड़ चाहते थे कि देशभर के केंद्रीय मंत्रियों के कार्यालयों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ-साथ उनकी तस्वीर भी लगाई जाए।
सूत्रों के अनुसार, यह मांग कई बार उनके द्वारा दोहराई गई थी। हालांकि, इस पर आधिकारिक रूप से न तो धनखड़ की ओर से कोई पुष्टि की गई है और न ही सरकार की ओर से कोई बयान सामने आया है।
🚘 Mercedes-Benz की कारें चाही थीं काफिले में?
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि उपराष्ट्रपति रहते हुए धनखड़ ने अपने सुरक्षा काफिले में Mercedes-Benz cars शामिल किए जाने की भी इच्छा जताई थी। यह एक ऐसी मांग थी जिसे सरकार ने शायद गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह मांग आधिकारिक रूप से उनके दफ्तर की ओर से की गई थी या नहीं।
🇺🇸 अमेरिकी उपराष्ट्रपति से मीटिंग पर भी हुआ था टकराव?
सूत्रों का यह भी कहना है कि जब US Vice President JD Vance भारत दौरे पर आने वाले थे, तो धनखड़ ने इस बात पर जोर दिया कि वे भी उपराष्ट्रपति हैं और उन्हें अमेरिकी समकक्ष से high-level bilateral meeting करनी चाहिए।
तब एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने हस्तक्षेप कर उन्हें यह स्पष्ट किया कि वेंस भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का संदेश देने आ रहे हैं—not for a VP-level diplomatic talk.
🗳️ चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारी, जल्द होगा नया उपराष्ट्रपति तय
Election Commission of India (ECI) ने इस पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग ने बताया कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करने से पहले electoral college list, Returning Officers, और past VP election documents की समीक्षा की जा रही है।
धनखड़ का इस्तीफा जितना चौंकाने वाला था, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाले हैं उन पर लगे अनौपचारिक डिमांड्स के आरोप। भले ही इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ये घटनाक्रम यह जरूर संकेत देते हैं कि भारत की दूसरी सबसे ऊंची संवैधानिक कुर्सी और सरकार के बीच सबकुछ ठीक नहीं था।